सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :देश के कई राज्यों में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) कार्य में रुकावट की शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने कहा कि यदि राज्यों या स्थानीय प्रशासन द्वारा एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डाली जा रही है तो वह आवश्यक आदेश जारी करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से स्पष्ट जानकारी मांगी है कि किन राज्यों में कार्य प्रभावित हो रहा है और किन परिस्थितियों में बूथ-स्तरीय अधिकारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि मतदाता सूची का निष्पक्ष और निर्बाध पुनरीक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप, प्रशासनिक लापरवाही या दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि यदि बीएलओ या अन्य कर्मचारी भय, धमकी या अत्यधिक कार्यभार के कारण काम नहीं कर पा रहे हैं, तो संबंधित राज्यों को तुरंत वैकल्पिक कर्मचारी उपलब्ध कराने होंगे।

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, त्रुटियों को ठीक करने और फर्जी या दोहरे नामों की जांच जैसी प्रक्रियाएँ पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए। यदि इस प्रक्रिया में विलंब या अवरोध होता है तो इसका सीधा प्रभाव चुनावों की निष्पक्षता पर पड़ सकता है। इसलिए अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करे और बताए कि किन कदमों से एसआईआर कार्य निर्धारित समय में पूरा कराया जा सकता है।

अदालत का यह सख्त रुख दर्शाता है कि लोकतंत्र के मूल ढांचे—सही और अद्यतन मतदाता सूची—को किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

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