सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (भारतीय विश्वविद्यालय संघ) और रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (आरएनटीयू), भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में एआईयू पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का विषय “उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का रणनीतिक एकीकरण: अवसर, चुनौतियां और प्रभाव” रहा। इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों और नवोद्यम प्रतिनिधियों ने उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग, नैतिकता, शोध, मूल्यांकन, संस्थागत संचालन और सामाजिक प्रभावों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन में उद्घाटन सत्र के साथ तीन तकनीकी सत्र, नवोद्यमों पर परिचर्चा और साइबर सुरक्षा पर वार्ता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आरएनटीयू के कुलाधिपति डॉ. संतोष चौबे, सह-कुलाधिपति डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स, एसजीएसयू के कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, एआईयू के अनुसंधान प्रभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अमरेंद्र पाणी, मुख्य वक्ता एवं उद्यमी, भविष्यवादी, लेखक तथा डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम केंद्र के संस्थापक सृजन पाल सिंह, मध्य प्रदेश शासन के मध्य प्रदेश नवोद्यम मिशन की कार्यकारी प्रमुख डॉ. आभा ऋषि, साइबर विशेषज्ञ अमित दुबे, आरएनटीयू के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) आर. पी. दुबे, सह-कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी तथा सम्मेलन के संयोजक डॉ. राकेश कुमार, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, इंटरनेट से जुड़ी वस्तुओं और उन्नत संगणना केंद्र, कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और विशेषज्ञ शामिल हुए।
उद्घाटन सत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति, मानवीय विवेक और नैतिकता पर जोर आरएनटीयू के कुलाधिपति डॉ. संतोष चौबे ने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय की कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति और मिशन पर चर्चा की। उन्होंने विश्वविद्यालयों को शोध, नवाचार और उत्पादन के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया। अपनी पुस्तक ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग निर्णय लेने में सहायता के लिए होना चाहिए, न कि उसे निर्णयों पर हावी होने देना चाहिए। उन्होंने भाषा, विचार, लोकतांत्रिक विमर्श और मानवीय मूल्यों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव से जुड़े नैतिक सवाल उठाते हुए शिक्षा में दर्शन, इतिहास और मानवीय मूल्यों की अहमियत रेखांकित की। आरएनटीयू की सह-कुलाधिपति डॉ. अदिति चतुर्वेदी वत्स ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने डिजिटल बदलाव के दौर में एआईएसईसीटी और आरएनटीयू के दृष्टिकोण और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा में तकनीकी नवाचार को अपनाने की आवश्यकता बताई। एआईयू के अनुसंधान प्रभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. अमरेंद्र पाणी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब भविष्य की संभावना नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुकी है। उन्होंने कुंभ जैसे बड़े आयोजनों में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पहचान करने जैसे तकनीकी उपयोगों का उदाहरण दिया। उन्होंने खंड शृंखला प्रौद्योगिकी, पांचवीं औद्योगिक क्रांति और मानव-मशीन सहयोग पर चर्चा करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग के लिए मजबूत ढांचे की जरूरत बताई।
मध्य प्रदेश शासन के मध्य प्रदेश नवोद्यम मिशन की कार्यकारी प्रमुख डॉ. आभा ऋषि ने कहा कि भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करने के साथ-साथ अपने मौलिक समाधान भी विकसित करने होंगे। उन्होंने तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता के प्रति आगाह करते हुए मौलिक विचारों, बाजार की जरूरतों और नवाचार के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने नवोद्यमों के लिए सरकारी सहयोग और प्रारूप निर्माण सहायता का उल्लेख करते हुए पांच लाख रुपये तक की सहायता का भी जिक्र किया। भारतीय उद्योग परिसंघ की मध्य प्रदेश राज्य परिषद के अध्यक्ष और एसजीएसयू के कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपकरणों का प्रभावी इस्तेमाल सिखाना चाहिए। उन्होंने आलोचनात्मक चिंतन, बदलती परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने और कक्षाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े कौशल पहुंचाने की जरूरत भी बताई। मुख्य वक्ता सृजन पाल सिंह ने विश्वविद्यालयों में स्पष्ट कृत्रिम बुद्धिमत्ता नीति बनाने, इस तकनीक के प्रति साक्षरता बढ़ाने और शिक्षकों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्राप्त जानकारी की सत्यता परखना और तथ्यों का आलोचनात्मक विश्लेषण करना सिखाना चाहिए। उन्होंने कला, विज्ञान और उद्यमिता के एकीकरण को भी भविष्य की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। आरएनटीयू के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) आर. पी. दुबे ने आभार व्यक्त करते हुए प्रभावी शिक्षण, सीखने की प्रक्रिया और शिक्षा में नैतिक बदलावों के महत्व पर प्रकाश डाला।
तकनीकी सत्रों में शिक्षण, शोध और संस्थागत संचालन पर चर्चा पहला तकनीकी सत्र ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण और अधिगम’ विषय पर आयोजित हुआ। गूगल की आंचल चोपड़ा ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपकरणों, स्वचालित कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायकों और समस्या समाधान में उनकी भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने शिक्षण और परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन जैसे कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की संभावनाओं का उल्लेख किया। एसजीएसयू के कुलगुरु एवं सत्र अध्यक्ष प्रो. डॉ. विजय सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सहायक की भूमिका में रहना चाहिए और उसे हर निर्णय का अंतिम आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। डॉ. संजय कुमार ने चिकित्सा और कानून जैसे क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग पर चर्चा करते हुए उसके परिणामों की विश्वसनीयता से जुड़े पहलुओं को रेखांकित किया। डॉ. रणवीर सिंह ने शिक्षकों की बढ़ती जिम्मेदारियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्राप्त परिणामों की जांच करने की जरूरत बताई। एआईयू के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक ने शिक्षा में बदलाव, शिक्षकों के प्रशिक्षण और विश्वविद्यालयों में मुक्त स्रोत कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रतिरूपों के उपयोग की संभावनाओं पर विचार रखे। दूसरा तकनीकी सत्र ‘शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर आयोजित हुआ। आईटीडीपीआर, एजीयू के कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिताभ सक्सेना ने ऑनलाइन कक्षाओं के शुरुआती दौर से तुलना करते हुए कहा कि तकनीकी बदलावों के बावजूद शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है। भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल के आंकड़ा विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. तन्मय बसु ने चित्र वर्गीकरण में संवलन तंत्रिका जाल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की व्याख्यात्मकता और स्वदेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधानों पर चर्चा की। डेलॉइट के निदेशक अमित नाइक ने महाभारत में अर्जुन और कृष्ण के उदाहरण के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में मार्गदर्शन और परामर्श के महत्व को रेखांकित किया। तीसरे तकनीकी सत्र ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मूल्यांकन और संस्थागत प्रशासन’ में मूल्यांकन, परिसर संचालन और संस्थागत स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एकीकरण पर चर्चा हुई। डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय, खंडवा के कुलपति प्रो. (डॉ.) अरुण रामेश जोशी ने उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए संस्थागत एकीकरण और बदलाव की संभावनाओं पर विचार साझा किए। एडुवैंटेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक डॉ. अभिषेक पंडित ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण भविष्य में परीक्षाओं और मूल्यांकन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ पाठ्यक्रम परिणाम और कार्यक्रम परिणाम को जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए कहा कि परिणाम के साथ-साथ उसे हासिल करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, भोपाल के इलेक्ट्रॉनिकी एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र के सहायक प्राध्यापक डॉ. राहुल के. चौरसिया ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यंत्र अधिगम, अति विशाल एकीकृत परिपथ और नियंत्रण प्रणालियों पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल जानकारी देने के बजाय उनकी समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार कार्य में मौलिक विचार और रचनात्मकता के महत्व को भी रेखांकित किया। टीसीएस के ग्राहक भागीदार एवं मुख्य परिचालन अधिकारी प्रशांत राठी ने परिसर संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने अलग-अलग समाधानों से आगे बढ़कर उद्यम स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता अपनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभावी उद्यम संसाधन नियोजन प्रणाली बनाने में मदद कर सकती है और विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों का व्यापक ज्ञान विकसित करना चाहिए।
नवोद्यमों के विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर परिचर्चा सम्मेलन में ‘नवोद्यमों के विकास का प्रमुख माध्यम कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। इसका संचालन एआईसी-आरएनटीयू की नवाचार संवर्धन प्रबंधक क्रति जैन ने किया। परिचर्चा में ऑप्साइट एआई प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलक रिजवानी, रिमोट फिजियोस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अनंत सिंह और ब्राइट हसल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक पांडेय शामिल रहे। चर्चा में नवोद्यमों के विकास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, नए समाधान विकसित करने और तकनीक को व्यावहारिक व्यवसाय में बदलने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ।
साइबर सुरक्षा पर वार्ता कार्यक्रम सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित वार्ता कार्यक्रम में साइबर विशेषज्ञ अमित दुबे ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में साइबर सुरक्षा, डिजिटल जोखिमों और ऑनलाइन सुरक्षित व्यवहार से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की। इसमें तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ डिजिटल जागरूकता, सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के महत्व को रेखांकित किया गया। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभावी एकीकरण केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में मानवीय विवेक, आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक जिम्मेदारी, मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है।
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