सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। बार-बार होने वाला सिरदर्द केवल थकान या तनाव की वजह से ही नहीं होता, कई बार यह आंखों से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार मोतियाबिंद, ग्लूकोमा और मधुमेह से जुड़ी आंखों की बीमारी धीरे-धीरे दृष्टि को प्रभावित कर सकती है। समय पर जांच और उपचार से गंभीर नुकसान को रोकने में मदद मिल सकती है।
विशेषज्ञ डॉ. महिपाल सिंह सचदेव के अनुसार मोतियाबिंद में आंख का प्राकृतिक लेंस धुंधला होने लगता है। इसके कारण धुंधला दिखाई देना, रात में देखने में परेशानी और तेज रोशनी से असहजता जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसका उपचार संभव है और समय पर पहचान होने पर दृष्टि में काफी सुधार किया जा सकता है।
वहीं ग्लूकोमा लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के बढ़ सकता है और आंख की दृष्टि तंत्रिका को नुकसान पहुंचा सकता है। शुरुआती अवस्था में इसका पता लगाने के लिए आंखों की व्यापक जांच जरूरी है। अचानक तेज आंखों का दर्द, लाल आंख, मितली और धुंधला दिखाई देना गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं और ऐसे में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार सिरदर्द, नजर कमजोर होना, लगातार आंखों में दर्द या धुंधला दिखाई देने की शिकायत रहती है तो आंखों के विशेषज्ञ से जांच कराना उचित है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप या परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास होने पर नियमित जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। आंखों की देखभाल के लिए विशेषज्ञों ने 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी है। इसके तहत हर 20 मिनट में करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखने से स्क्रीन के कारण होने वाले आंखों के तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। पर्याप्त रोशनी, सही दूरी, पर्याप्त नींद और
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