सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जहरीले सांपों के काटने से होने वाली मौतों और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में वैज्ञानिकों ने एक नई संभावित दिशा खोजी है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के शोधकर्ताओं ने रैटलस्नेक के खून में मौजूद कुछ ऐसे प्रोटीन की पहचान की है, जो सांप के जहर के खतरनाक प्रभावों को रोकने में सक्षम पाए गए हैं।

शोध में वेस्टर्न डायमंडबैक रैटलस्नेक के रक्त में पाए जाने वाले FETUA परिवार के प्रोटीन पर ध्यान दिया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि अलग-अलग प्रोटीन जहर के अलग-अलग प्रभावों को रोकते हैं। जब कुछ प्रोटीन को विशेष संयोजन में मिलाया गया, तो प्रयोगशाला परीक्षणों में उनका प्रभाव मौजूदा व्यावसायिक एंटीवेनम की तुलना में करीब 10 गुना अधिक पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन प्रोटीन संयोजनों ने रैटलस्नेक के जहर के घातक प्रभाव को प्रयोगशाला जानवरों में रोकने के साथ कुछ अन्य वाइपर प्रजातियों के जहर के खिलाफ भी सुरक्षा दिखाई। इससे भविष्य में अधिक प्रभावी और व्यापक असर वाले एंटीवेनम विकसित करने की संभावना बनी है।

हालांकि, यह शोध अभी शुरुआती चरण में है। इंसानों में इसकी सुरक्षा, सही खुराक और सांप के काटने के बाद वास्तविक उपचार के रूप में प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए आगे के अध्ययन जरूरी हैं। फिलहाल सांप के काटने की स्थिति में चिकित्सकीय उपचार और उपलब्ध एंटीवेनम ही मानक उपचार का हिस्सा है।


Hashtags: #ScienceTechnology #Bhopal #Desksource #टलस #जहर #एनएन #DeskSource #टवर #आईट #समस