सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय क्रिकेट में रणजी ट्रॉफी को टेस्ट क्रिकेट की मजबूत बुनियाद माना जाता है। इसी घरेलू प्रतियोगिता में खिलाड़ी लंबे प्रारूप में अपनी तकनीक, धैर्य और प्रदर्शन साबित करते हैं और राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का दावा पेश करते हैं। लेकिन 2026-27 के घरेलू सीजन की शुरुआत के साथ भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के कार्यक्रम पर सवाल उठ रहे हैं। रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों के बीच इंडिया-ए के दौरे रखे जाने से कई प्रमुख खिलाड़ी अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। इससे घरेलू क्रिकेट की प्राथमिकता और खिलाड़ियों के चयन के मूल्यांकन को लेकर बहस तेज हो गई है।
रणजी के साथ टकरा रहा इंडिया-ए का कार्यक्रम रणजी ट्रॉफी का नया सीजन 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ। इसी समय भारत-ए और ऑस्ट्रेलिया-ए के बीच अनौपचारिक वनडे सीरीज का अंतिम मुकाबला भी खेला गया। इस कार्यक्रम के कारण रजत पाटीदार, देवदत्त पडिक्कल और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी अपनी-अपनी राज्य टीमों के लिए उपलब्ध नहीं थे। पाटीदार मध्य प्रदेश, पडिक्कल कर्नाटक और गायकवाड़ महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बाद इंडिया-ए की टीम का न्यूजीलैंड दौरा 24 अक्टूबर से शुरू होना है, जहां टीम तीन बहुदिवसीय मुकाबले खेलेगी। यह दौरा भी रणजी ट्रॉफी के पहले चरण के दौरान हो रहा है। ऐसे में घरेलू टीमों को अपने कुछ प्रमुख खिलाड़ियों के बिना मैदान पर उतरना पड़ सकता है।
इंडिया-ए के दौरे क्यों हैं जरूरी? इंडिया-ए के दौरे भारतीय क्रिकेट व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन मुकाबलों से खिलाड़ियों को विदेशी परिस्थितियों में खेलने का अनुभव मिलता है। तेज गेंदबाजों को अलग-अलग पिचों पर अपनी क्षमता दिखाने और बल्लेबाजों को नई परिस्थितियों में तकनीक परखने का अवसर मिलता है। चयनकर्ताओं को भी भविष्य की राष्ट्रीय टीम के लिए खिलाड़ियों का आकलन करने में मदद मिलती है। लेकिन सवाल इन दौरों की उपयोगिता पर नहीं, बल्कि उनके कार्यक्रम और रणजी ट्रॉफी के बीच तालमेल पर है। यदि घरेलू सीजन पहले से निर्धारित है, तो कार्यक्रम तैयार करते समय यह सुनिश्चित करने की कोशिश होनी चाहिए कि राज्य टीमों को बार-बार अपने प्रमुख खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी का सामना न करना पड़े।
राज्य टीमों और खिलाड़ियों पर क्या असर पड़ता है? रणजी ट्रॉफी में किसी खिलाड़ी का प्रदर्शन उसके करियर के लिए महत्वपूर्ण होता है। बल्लेबाजों के रन, गेंदबाजों के विकेट और लंबे समय तक दबाव में खेलने की क्षमता राष्ट्रीय चयन में भूमिका निभा सकती है। लेकिन जब प्रमुख खिलाड़ी इंडिया-ए के कार्यक्रम में व्यस्त होते हैं, तो राज्य टीमों का संतुलन प्रभावित हो सकता है।
किसी टीम के प्रमुख बल्लेबाज की अनुपस्थिति से बल्लेबाजी क्रम कमजोर हो सकता है, जबकि अनुभवी गेंदबाज के नहीं खेलने से गेंदबाजी आक्रमण पर असर पड़ सकता है। इससे टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन भी प्रभावित हो सकता है। हालांकि, किसी खिलाड़ी की गैरमौजूदगी अपने आप में प्रतियोगिता के परिणाम को तय नहीं करती, लेकिन लगातार होने वाले कार्यक्रमगत टकराव पर विचार करना जरूरी है। घरेलू प्रदर्शन के मूल्यांकन पर भी सवाल पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर ने घरेलू क्रिकेट की व्यवस्था और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आकलन से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए हैं। रणजी ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन करना राष्ट्रीय टीम में जगह पाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफल होने के लिए खिलाड़ी को अलग तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए चयन प्रक्रिया में घरेलू आंकड़ों के साथ तकनीक, निरंतरता, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता और टीम की जरूरतों को भी ध्यान में रखना होता है।
बीसीसीआई के सामने संतुलन बनाने की चुनौती बीसीसीआई के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट, इंडिया-ए के दौरों और घरेलू प्रतियोगिताओं के बीच तालमेल बनाना आसान नहीं है। अलग-अलग टीमों के कार्यक्रम, खिलाड़ियों की उपलब्धता और विदेशी दौरों की समय-सीमा जैसी कई बातें इसमें शामिल होती हैं। इसके बावजूद रणजी ट्रॉफी जैसे प्रमुख घरेलू टूर्नामेंट की अहमियत को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम तैयार करना जरूरी है। बेहतर योजना से इंडिया-ए के दौरों को घरेलू क्रिकेट से टकराने से बचाया जा सकता है या कम से कम टकराव का असर घटाया जा सकता है। इससे राज्य टीमों को मजबूत संयोजन के साथ खेलने का अवसर मिलेगा और खिलाड़ियों को घरेलू स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित करने के पर्याप्त मौके मिलेंगे। रणजी ट्रॉफी केवल एक घरेलू प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट में नए खिलाड़ियों को तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच है। यदि इसी मंच से राष्ट्रीय टीम के लिए प्रतिभाएं तलाशनी हैं, तो इसके कार्यक्रम, प्रतिस्पर्धा और खिलाड़ियों की उपलब्धता को भी उतनी ही गंभीरता से लेना होगा।
Hashtags: #Sports #Bhopal #रणज #बनत #अनद #एनएन #टवर #आईट #मजब #रणजटरफ