सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। पंचायती राज विभाग ने ऐसे प्रस्ताव तैयार किए हैं, जिनके तहत अब केवल पढ़े-लिखे यानी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले लोग ही सरपंच और पार्षद बन सकेंगे। इस प्रस्ताव का उद्देश्य स्थानीय निकायों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, शिक्षा की न्यूनतम योग्यता तय करने से ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में योजनाओं के क्रियान्वयन, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और डिजिटल कार्यों में आसानी होगी। वर्तमान समय में कई सरकारी योजनाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित हो रही हैं, ऐसे में जनप्रतिनिधियों का शिक्षित होना आवश्यक माना जा रहा है।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी शुरू हो गई है। कुछ संगठनों का कहना है कि यह फैसला लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित कर सकता है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि इससे पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
पंचायती राज विभाग के प्रस्ताव को राज्य सरकार के समक्ष मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद इसे कानून का रूप दिया जा सकता है। यदि यह नियम लागू होता है तो आगामी पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में इसके असर देखने को मिलेंगे।
यह कदम राजस्थान की स्थानीय शासन प्रणाली में सुधार और आधुनिक प्रशासन की दिशा में अहम माना जा रहा है।