सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर सवाल उठाए हैं जिसमें राष्ट्रपति और राज्यपाल को विधेयकों पर फैसला लेने के लिए समयसीमा निर्धारित की गई थी। उन्होंने कहा कि संविधान में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे सर्वोच्च न्यायालय ऐसा निर्देश दे सके।

बुधवार को राष्ट्रपति मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से 14 महत्वपूर्ण सवाल पूछे, जिनमें राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों, न्यायिक हस्तक्षेप और समयसीमा तय करने जैसे संवैधानिक मुद्दे शामिल हैं। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब तमिलनाडु सरकार के कुछ विधेयकों को राज्यपाल ने राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेजा था, और उस पर समय से फैसला नहीं हुआ।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि राज्यपाल के पास किसी विधेयक को अनिश्चितकाल तक रोके रखने की शक्ति नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जब कोई विधेयक राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भेजा जाए, तो उस पर 3 महीने में निर्णय अनिवार्य है।

उपराष्ट्रपति धनखड़ और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के बयानों के बाद यह बहस और गहराती जा रही है। एक ओर जहां धनखड़ ने अदालत के हस्तक्षेप को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर आघात बताया, वहीं सिब्बल ने कहा कि जब कार्यपालिका विफल होती है, तब न्यायपालिका को दखल देना जरूरी हो जाता है।

राष्ट्रपति के इस रुख ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच शक्ति-संतुलन पर गहरी संवैधानिक बहस छेड़ दी है।

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