सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय द्वारा देश के विभिन्न चयनित संस्थाओं को पीएम उषा एमईआरयू परियोजना के रूप में 35 विश्वविद्यालय को 100-100 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है जिससे विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय में बेहतर शोध व इनोवेशन की सुविधा प्रदान की जा सके। इसी के तहत भारत सरकार द्वारा 30 अप्रैल एवं 1 मई 2025 को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन दिल्ली में किया गया जिसमें एनईपी 2020 के मुख्य चार स्तंभ जवाबदेही, पहुंच, हिस्सेदारी एवं सामर्थ के विषयों पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। इसी कार्यशाला में मुख्य रूप से देश की शैक्षणिक दशा को सुदृढ़ करने हेतु 12 मुख्य मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई जिसमें से एक शोध इनोवेशन एवं इंटरनेशनल कोलैबोरेशन पर विस्तृत चर्चा हेतु पांच विश्वविद्यालयों बरकतुल्ला विश्वविद्यालय भोपाल, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय असम, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी, मैसूर विश्वविद्यालय मैसुरू,मदुरई कामराज विश्वविद्यालय मदुरई का क्लस्टर तैयार किया गया।इसी के तहत बरकतउल्ला विश्वविद्यालय ने आज दिनांक 4 नवंबर 25 को तीन विश्वविद्यालयों मैसूर विश्वविद्यालय मैसुरू,सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन एवं डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय असम के साथ


पीएम उषा मेरू स्कीम के अंतर्गत एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस कार्यक्रम में मैसूर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर एन.के. लोकनाथ, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलगुरु प्रोफेसर अर्पण भारद्वाज, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय असम से प्रोफेसर देव कुमार चक्रवर्ती, प्रोफेसर अंकुर भराली एवं प्रोफेसर चंदन शर्मा जी शामिल हुए । इस अवसर पर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के कुलगुरु प्रोफेसर एस के जैन एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के कुलसचिव अनिल शर्मा उपस्थित रहे एवं हस्ताक्षर किए। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल ने द्विपक्षीय एमओयू डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय असम के साथ एवं त्रिपक्षीय एमओयू सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन एवं मैसूर विश्वविद्यालय के साथ किया।


इस अवसर पर मैसूर विश्वविद्यालय के कुलगुरु एन के लोकनाथ ने अपने उद्बोधन में इस एमओयू को काफी उपयोगी बताते हुए कहा कि यह एमओयू सभी यूनिवर्सिटीज के एकेडमिक रिसर्च एवं सांस्कृतिक उत्थान के लिए उपयोगी होगा। इन एम ओ यू के उपरांत सभी विश्वविद्यालय किसी न किसी रूप में एक दूसरे के साथ सहभागिता कर सकेंगे एवं एक दूसरे के सहायक होंगे।
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन से पधारे कुलगुरु प्रोफेसर अर्पण भारद्वाज ने संबोधित करते हुए कहा यह एमओयू सभी विश्वविद्यालयों के लिए अत्यधिक उपयोगी एवं सहायक होगा एवं इस क्लस्टरिंग से सभी विश्वविद्यालयों को लाभ निश्चित तौर पर होगा। उन्होंने अपने वक्तव्य में नवाचार एवं रिसर्च को प्रमुखता से शामिल करने की बात कही।
डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय असम से आए हुए प्रोफेसर अंकुर भराली एवं प्रोफेसर देव कुमार चक्रवर्ती ने भी उद्बोधन दिया एवं इन एमओयू को सार्थक बताया।कार्यक्रम में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के कुल गुरु प्रोफेसर एस.के. जैन ने इन एमओयू काफी उपयोगी बताया एवं इन के अंतर्गत विश्वविद्यालय में गतिविधियों को आयोजित करने के लिए आश्वस्त किया।
इस अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उदय सिंह एवं बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के संकायध्यक्ष प्रोफेसर रागिनी गोथलवाल, प्रोफेसर नीरज गौर, प्रोफेसर अंशुजा तिवारी, प्रोफेसर रुचि घोष ने अपने संकायों के बारे में विस्तृत विवरण दिया।
कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ अनिल शर्मा द्वारा दिया गया।
इस कार्यक्रम का आयोजन पीएम उषा समिति के प्रोफेसर विपिन व्यास,डॉ आर के गर्ग ,एवं डॉ.रेखा खंड्या द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन एमओयू कोऑर्डिनेटर डॉ रुपाली शेवलकर ने किया।इस अवसर पर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के सभी संकायाध्यक्ष विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक उपस्थित रहे।

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