सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: परिवारों पर बढ़ता कर्ज, घटती शुद्ध बचत: आर्थिक सुरक्षा के लिए बढ़ी चिंता

वित्त वर्ष 2025-26 में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत 3.9% घटी, कर्ज में 36.7% की बढ़ोतरी

देश में घरेलू परिवारों की वित्तीय स्थिति को लेकर सामने आए आंकड़े अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करते हैं। परिवार बैंक जमा, छोटी बचत योजनाओं और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन उनके वित्तीय कर्ज में इससे कहीं अधिक तेजी से वृद्धि हो रही है। इसका असर उनकी शुद्ध वित्तीय बचत पर पड़ा है।

भारतीय रिजर्व बैंक के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत घटकर 21.69 लाख करोड़ रुपये रह गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 22.57 लाख करोड़ रुपये थी। इस प्रकार एक साल में शुद्ध वित्तीय बचत में लगभग 88 हजार करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।

यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि घरेलू बचत परिवारों को आर्थिक अनिश्चितता, रोजगार में बदलाव, स्वास्थ्य संबंधी खर्चों और भविष्य की जरूरतों से निपटने में मदद करती है। यदि कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता है, तो परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा ब्याज और किस्तों के भुगतान में खर्च हो सकता है।

1. वित्तीय संपत्तियों की तुलना में कर्ज की रफ्तार करीब तीन गुना

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में परिवारों की वित्तीय संपत्तियों में 43.20 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। यह पिछले वर्ष के 38.31 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 12.8 प्रतिशत अधिक है।

इसके विपरीत, परिवारों की वित्तीय देनदारियों में 21.51 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई, जबकि 2024-25 में यह बढ़ोतरी 15.74 लाख करोड़ रुपये थी। यानी वित्तीय कर्ज में सालाना वृद्धि 36.7 प्रतिशत रही।

प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

वित्तीय संपत्तियों में वृद्धि: 38.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 43.20 लाख करोड़ रुपये।

वित्तीय कर्ज में वृद्धि: 15.74 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 21.51 लाख करोड़ रुपये।

शुद्ध वित्तीय बचत: 22.57 लाख करोड़ रुपये से घटकर 21.69 लाख करोड़ रुपये।

शुद्ध बचत में गिरावट: लगभग 3.9 प्रतिशत।

ये आंकड़े बताते हैं कि परिवारों की वित्तीय संपत्तियां बढ़ रही हैं, लेकिन देनदारियों में तेज वृद्धि के कारण शुद्ध बचत का स्तर नीचे आया है। हालांकि, केवल इन आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी परिवार कर्ज के दबाव में हैं। वास्तविक स्थिति आय, कर्ज के उद्देश्य, ब्याज दर और भुगतान क्षमता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

2. बैंक जमा और छोटी बचत योजनाओं में बढ़ा निवेश

परिवारों ने बैंक जमा और गैर-बैंक जमा जैसे वित्तीय साधनों में निवेश बढ़ाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन जमाओं में 15.32 लाख करोड़ रुपये जुड़े, जो पिछले वर्ष की तुलना में 22.1 प्रतिशत अधिक बताए गए हैं।

पीपीएफ को छोड़कर छोटी बचत योजनाओं में निवेश भी 48 प्रतिशत बढ़कर 3.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

इस रुझान के कई संभावित अर्थ हो सकते हैं। एक ओर परिवार अपनी बचत को सुरक्षित रखने और भविष्य की जरूरतों के लिए धन जुटाने पर ध्यान दे रहे हैं। दूसरी ओर, बाजार की अनिश्चितता या व्यक्तिगत वित्तीय जरूरतें भी निवेश के विकल्पों को प्रभावित कर सकती हैं।

बैंक जमा और छोटी बचत योजनाएं परिवारों को अपेक्षाकृत स्थिर वित्तीय आधार प्रदान कर सकती हैं। हालांकि, परिवारों के लिए जरूरी है कि वे अपनी जरूरतों, निवेश की अवधि, उपलब्ध ब्याज दरों और जोखिम के स्तर के अनुसार बचत के विकल्प चुनें।

3. सीधे शेयर बाजार में निवेश के रुझान में बदलाव

रिपोर्ट में प्रत्यक्ष शेयर निवेश के संबंध में भी बदलाव का उल्लेख है। पिछले वित्त वर्ष में जहां परिवारों की ओर से शुद्ध निवेश दर्ज किया गया था, वहीं 2025-26 में शुद्ध निकासी की स्थिति सामने आई।

इस बदलाव के पीछे बाजार में उतार-चढ़ाव, जोखिम के प्रति निवेशकों की धारणा, नकदी की जरूरत या दूसरे निवेश विकल्पों की ओर रुझान जैसे कई कारण हो सकते हैं। उपलब्ध आंकड़े किसी एक कारण को निर्णायक रूप से स्थापित नहीं करते।

शेयर बाजार में निवेश लंबे समय में संपत्ति निर्माण का माध्यम हो सकता है, लेकिन इसमें जोखिम भी रहता है। इसलिए निवेशकों को केवल बाजार के अल्पकालिक रुझानों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय अपनी आर्थिक स्थिति, निवेश अवधि और जोखिम सहने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए।

4. बैंकों से परिवारों की उधारी में 31 प्रतिशत की वृद्धि

वित्त वर्ष 2025-26 में परिवारों के बैंक कर्ज में 16.17 लाख करोड़ रुपये जुड़े। इससे पिछले वर्ष बैंक कर्ज में 12.35 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। इस प्रकार बैंक ऋण में नई वृद्धि लगभग 31 प्रतिशत रही।

बैंक कर्ज का बढ़ना अपने आप में नकारात्मक संकेत नहीं है। आवास, वाहन, शिक्षा और कारोबार जैसी जरूरतों के लिए लिया गया कर्ज परिवारों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है। लेकिन यदि ऋण का स्तर आय और भुगतान क्षमता की तुलना में बहुत अधिक हो जाए, तो वित्तीय जोखिम बढ़ सकता है।

परिवारों को कर्ज लेने से पहले निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:

मासिक आय और नियमित खर्च का सही आकलन करें।

मौजूदा ईएमआई और अन्य देनदारियों को ध्यान में रखें।

ब्याज दर, ऋण की अवधि और कुल भुगतान राशि की तुलना करें।

अनिश्चित आय की स्थिति में अतिरिक्त कर्ज लेने से बचें।

आपातकालीन जरूरतों के लिए कुछ बचत अलग रखें।

5. एनबीएफसी से कर्ज लगभग दोगुना हुआ

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी से परिवारों की नई उधारी में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह राशि 2024-25 के 2.52 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 4.85 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।

एनबीएफसी कई तरह के ऋण उपलब्ध कराती हैं और कुछ परिस्थितियों में लोगों को वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करती हैं। लेकिन अलग-अलग ऋण उत्पादों की ब्याज दरें, शुल्क और शर्तें भिन्न हो सकती हैं।

इसलिए उधारकर्ताओं के लिए आवश्यक है कि वे ऋण की कुल लागत को समझें और केवल जल्द ऋण मिलने के आधार पर फैसला न करें। वित्तीय संस्थानों को भी ऋण देने से पहले उधारकर्ता की भुगतान क्षमता का उचित आकलन करना चाहिए तथा सभी शर्तों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए।

6. घरेलू बचत में गिरावट क्यों महत्वपूर्ण है?

परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत में कमी का प्रभाव केवल व्यक्तिगत बजट तक सीमित नहीं रहता। घरेलू बचत बैंकिंग व्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए निवेश योग्य संसाधनों का एक महत्वपूर्ण स्रोत होती है।

यदि परिवारों की बचत पर कर्ज की किस्तों और ब्याज भुगतान का दबाव बढ़ता है, तो भविष्य की जरूरतों के लिए धन जुटाना मुश्किल हो सकता है। इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवानिवृत्ति की तैयारी और अन्य दीर्घकालिक लक्ष्यों पर पड़ सकता है।

फिर भी, शुद्ध वित्तीय बचत और कुल घरेलू संपत्ति में अंतर समझना जरूरी है। वित्तीय बचत के आंकड़ों में जमीन और मकान जैसी गैर-वित्तीय संपत्तियां शामिल नहीं होतीं। इसलिए शुद्ध वित्तीय बचत में गिरावट को कुल घरेलू संपत्ति में गिरावट का सीधा प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

7. सरकार और वित्तीय संस्थानों की क्या होनी चाहिए भूमिका?

घरेलू कर्ज और बचत के बदलते रुझानों को देखते हुए नीति-निर्माताओं और वित्तीय संस्थानों को संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

जिम्मेदार ऋण वितरण: बैंकों और एनबीएफसी को उधारकर्ता की आय तथा भुगतान क्षमता का आकलन करना चाहिए।

वित्तीय साक्षरता: लोगों को ब्याज, ईएमआई, कर्ज की कुल लागत और निवेश जोखिम के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

बचत को प्रोत्साहन: परिवारों को नियमित बचत और आपातकालीन निधि बनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

कर्ज की निगरानी: घरेलू ऋण के स्तर, ब्याज भुगतान और भुगतान में संभावित कठिनाइयों पर लगातार नजर रखी जानी चाहिए।

पारदर्शिता: ऋण उत्पादों की शर्तें, शुल्क और जोखिम ग्राहकों को सरल भाषा में बताए जाने चाहिए।

इन कदमों से परिवारों को ऋण का लाभ उठाने और अनावश्यक वित्तीय जोखिम से बचने के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष: आर्थिक विकास के साथ घरेलू वित्तीय सुरक्षा भी जरूरी

वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़े घरेलू वित्तीय स्थिति की मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। परिवारों की वित्तीय संपत्तियों में वृद्धि हुई है और बैंक जमा तथा छोटी बचत योजनाओं में निवेश भी बढ़ा है। इसके बावजूद, वित्तीय देनदारियों में तेज उछाल के कारण शुद्ध वित्तीय बचत में गिरावट आई है।

यह आंकड़े अपने आप में किसी व्यापक घरेलू कर्ज संकट का प्रमाण नहीं हैं, लेकिन इनके रुझान पर गंभीरता से नजर रखने की जरूरत है। आर्थिक प्रगति का मूल्यांकन केवल ऋण की उपलब्धता या निवेश में वृद्धि से नहीं किया जा सकता। यह भी देखना जरूरी है कि आम परिवार अपनी मौजूदा जरूरतों को पूरा करने के बाद भविष्य के लिए पर्याप्त बचत कर पा रहे हैं या नहीं।

परिवारों की वित्तीय मजबूती के लिए बचत, निवेश और कर्ज के बीच संतुलन आवश्यक है। सरकार, वित्तीय संस्थानों और नागरिकों को मिलकर ऐसी वित्तीय संस्कृति विकसित करनी होगी, जिसमें आज की जरूरतें पूरी करने के साथ भविष्य की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

नोट: रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को प्रारंभिक अनुमान और 2024-25 के आंकड़ों को संशोधित अनुमान बताया गया है। इसलिए आंकड़ों की व्याख्या करते समय इस तथ्य को ध्यान में रखना जरूरी है।


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