सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हर 11 में से 1 छात्र ने बताए आत्महत्या के विचार, सर्वे में खुलासा

नई दिल्ली। उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मानसिक सेहत को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित राष्ट्रीय कार्यबल के राष्ट्रव्यापी सर्वे में गंभीर स्थिति सामने आई है। 2.43 लाख से अधिक छात्रों से मिले जवाबों में करीब 9 प्रतिशत छात्रों ने बताया कि पिछले एक साल में उन्हें अक्सर या बहुत बार आत्महत्या के विचार आए। यह आंकड़ा लगभग हर 11 छात्रों में से एक के बराबर है।

सर्वे के अनुसार, करीब 15 प्रतिशत छात्रों ने पिछले छह महीनों में कई सप्ताह तक अत्यधिक तनाव, खराब मनोदशा या चिंता से गुजरने की बात कही। वहीं करीब 34 प्रतिशत छात्रों ने किसी न किसी स्तर पर अपने संस्थान में खुद को बाहरी व्यक्ति जैसा महसूस करने की जानकारी दी। सर्वे में शामिल लगभग 67 प्रतिशत छात्र अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से थे।

संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं। करीब 32 प्रतिशत छात्रों ने कहा कि उनके संस्थान में परामर्श सुविधा उपलब्ध नहीं है, जबकि केवल 56 प्रतिशत छात्रों ने माना कि उन्हें भरोसा है कि प्रशासन गंभीर मामलों को निष्पक्ष तरीके से संभालेगा। रिपोर्टिंग के अनुसार, 70 प्रतिशत से अधिक सर्वे किए गए संस्थानों में पूर्णकालिक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ नहीं थे।

राष्ट्रीय कार्यबल ने स्पष्ट किया है कि सर्वे के मौजूदा निष्कर्ष प्रारंभिक और अस्थायी हैं, क्योंकि इसका नमूना पूरे छात्र समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं करता। कार्यबल की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2026 तक सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने की उम्मीद है। इसमें छात्रों की मानसिक सेहत, संस्थागत सहायता और आत्महत्या रोकथाम के उपायों पर सिफारिशें शामिल होंगी।


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