सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रात में सोते समय हाथ का सुन्न हो जाना या उसमें झनझनाहट महसूस होना एक आम समस्या है। कई बार यह सोने की गलत मुद्रा या हाथ पर दबाव पड़ने के कारण होता है और स्थिति बदलने पर ठीक हो जाता है। लेकिन यदि ऐसा बार-बार हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ दर्द और कमजोरी भी महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे नसों पर दबाव से लेकर मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
हाथ सुन्न होने की क्या हैं वजहें? सोते समय हाथ को शरीर के नीचे दबाकर रखने या कलाई को लंबे समय तक मोड़कर रखने से नसों पर दबाव पड़ सकता है। इससे हाथ में अस्थायी सुन्नपन और झनझनाहट महसूस होती है। आमतौर पर हाथ की स्थिति बदलने पर राहत मिल जाती है। एक अन्य कारण कार्पल टनल सिंड्रोम हो सकता है। इसमें कलाई के भीतर मौजूद माध्यिका तंत्रिका पर दबाव पड़ता है, जिससे अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा उंगली में सुन्नपन, झनझनाहट या दर्द हो सकता है। कई लोगों में इसके लक्षण रात के समय अधिक महसूस होते हैं। गंभीर स्थिति में हाथ की पकड़ कमजोर हो सकती है।
गर्दन की नसों और मधुमेह से भी संबंध गर्दन की हड्डियों या डिस्क में बदलाव के कारण नसों पर दबाव पड़ने से हाथ तक दर्द और झनझनाहट पहुंच सकती है। मधुमेह से जुड़ी तंत्रिका संबंधी समस्या और विटामिन बी12 की कमी भी हाथ-पैरों में सुन्नपन पैदा कर सकती है। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक है।
कब हो सकता है खतरा? यदि हाथ बार-बार सुन्न होता है, लंबे समय तक सामान्य महसूस नहीं होता या हाथ की ताकत कम होने लगती है, तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। वस्तुएं पकड़ने में परेशानी, लगातार दर्द या गर्दन से हाथ तक फैलने वाली झनझनाहट भी जांच की जरूरत का संकेत हो सकती है।यदि अचानक हाथ सुन्न या कमजोर हो जाए और साथ में चेहरे का एक हिस्सा लटकने लगे, बोलने में परेशानी हो, देखने में बदलाव आए या संतुलन बिगड़ जाए, तो यह स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय सोते समय हाथ को शरीर के नीचे दबाकर न रखें और कलाई को अधिक मोड़ने से बचें। यदि समस्या बार-बार होती है, तो चिकित्सक की सलाह से रात में कलाई को सीधा रखने वाला सहायक उपकरण इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना जांच के स्वयं दवा लेने से बचें और लगातार बने रहने वाले लक्षणों का कारण पता करवाएं।
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