बिहार में नीतीश कुमार की नई सरकार के बाद कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। वर्तमान में मंत्रिमंडल में 9 पद खाली हैं, जिन्हें भरने को लेकर सियासी हलचल बढ़ी हुई है। सूत्रों के अनुसार, जेडीयू इन स्थानों पर अपने सहयोगियों और ‘अतिथि’ विधायकों को शामिल करने की रणनीति पर विचार कर रही है। पार्टी इंतजार कर रही है उन विधायकों का, जिनके समर्थन से सरकार की संख्या शक्ति और मजबूत हो सकती है।
बिहार की राजनीति में हाल ही में हुए समीकरण बदलाव के बाद जेडीयू की कोशिश है कि कैबिनेट में ऐसे चेहरों को जगह दी जाए जो राजनीतिक संतुलन, जातीय समीकरण और शासन क्षमता—तीनों को साध सकें। वहीं बीजेपी भी अपने हिस्से के चेहरों को जल्द शामिल करने के लिए दबाव बना रही है।
कैबिनेट विस्तार न केवल सत्ता समीकरणों को स्पष्ट करेगा, बल्कि आगामी महीनों में सरकार की प्राथमिकताओं का भी संकेत देगा। जानकारों का मानना है कि मंत्रालयों के वितरण में विकास, रोजगार, ग्रामीण ढांचा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जा सकती है।
इस बीच राजनीतिक गलियारों में ‘अतिथि’ विधायकों को लेकर कई अटकलें चल रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन 9 सीटों पर किन नेताओं को मौका मिलता है और इससे सरकार की दिशा क्या तय होती है।
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