सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नेतन्याहू बोले, मिस्र के खुफिया चीफ से नहीं मिला, 59 मिनट रहे इजरायल में
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्वीकार किया है कि मिस्र के तत्कालीन खुफिया प्रमुख अब्बास कामेल ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले से पहले इजरायल का दौरा किया था। नेतन्याहू के मुताबिक, कामेल इजरायल में करीब 59 मिनट तक रहे, लेकिन इस दौरान उनकी नेतन्याहू से मुलाकात नहीं हुई। यह बयान ऐसे समय आया है, जब हमास के हमले से पहले इजरायल को संभावित खतरे की चेतावनी मिलने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। टीवी इंटरव्यू में नेतन्याहू का दावा नेतन्याहू ने इजरायल के चैनल 14 को दिए इंटरव्यू में कहा कि अब्बास कामेल इजरायल आए थे, लेकिन वह उनसे नहीं मिले। उन्होंने बताया कि उस समय वह इजरायली सैनिकों के स्मृति समारोह में शामिल थे। नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि मिस्र के खुफिया प्रमुख ने इजरायल में किससे मुलाकात की थी।
उन्होंने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि हमास के हमले से पहले मिस्र की ओर से मिली चेतावनी को इजरायली नेतृत्व ने नजरअंदाज किया। नेतन्याहू ने इसे उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों का हिस्सा बताया। हमास के हमले से पहले चेतावनी का मुद्दा 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया था। इस हमले में लगभग 1,200 लोगों की मौत हुई और करीब 250 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया। इसके बाद इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जनहानि और मानवीय संकट पैदा हुआ।
विदेशी मीडिया में पहले भी रिपोर्टें आई थीं कि मिस्र के अधिकारियों ने हमले से पहले गाजा में बढ़ते तनाव को लेकर इजरायल को आगाह किया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि चेतावनी कितनी विशिष्ट थी, उसमें हमले के समय या तरीके की जानकारी थी या नहीं, और इजरायल के किस स्तर के अधिकारियों तक यह सूचना पहुंची थी। राजनीतिक विवाद फिर तेज nअब्बास कामेल की यात्रा को लेकर नेतन्याहू के बयान ने इजरायल में खुफिया विफलता और जवाबदेही से जुड़ी बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। मुख्य सवाल यह है कि हमले से पहले उपलब्ध सूचनाओं का आकलन कैसे किया गया और क्या सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे को पर्याप्त गंभीरता से लिया था। नेतन्याहू ने कामेल से व्यक्तिगत मुलाकात से इनकार किया है, लेकिन इससे यह सवाल अपने आप समाप्त नहीं होता कि मिस्र की ओर से कोई चेतावनी अन्य इजरायली अधिकारियों तक पहुंची थी या नहीं। इस मुद्दे पर उपलब्ध दावों और आधिकारिक बयानों की जांच आगे भी इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था तथा राजनीतिक जवाबदेही पर बहस को प्रभावित कर सकती है।
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