सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में सेंगोल, चोल काल से जुड़ा इतिहास
नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में सेंगोल को भी शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी–इंडिया एंड बियॉन्ड, भाग-2’ नाम की इस पुस्तक में सेंगोल को शासन और सुशासन से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में बताया गया है।
किताब के शासन और सार्वजनिक नीति से जुड़े अध्याय में सेंगोल की परंपरा को चोल राजवंश के काल से जोड़ा गया है। पुस्तक के अनुसार, धर्मसम्मत शासन के प्रतीक के रूप में सेंगोल के इस्तेमाल की परंपरा एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी मानी जाती है। वर्ष 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया गया था।
पुस्तक में सेंगोल का संबंध 1947 में भारत की स्वतंत्रता और सत्ता हस्तांतरण से भी बताया गया है। इसमें उल्लेख है कि स्वतंत्रता के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को तमिलनाडु की आदीनम परंपरा से जुड़े संतों की ओर से सेंगोल दिया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 2023 में सेंगोल को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक बताया था।
हालांकि, सेंगोल के 1947 के सत्ता हस्तांतरण से जुड़े होने के दावे पर कांग्रेस सवाल उठाती रही है। पार्टी का कहना है कि लॉर्ड माउंटबेटन, सी. राजगोपालाचारी और जवाहरलाल नेहरू द्वारा इसे सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक बताए जाने का दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, संस्कृति मंत्रालय सेंगोल को प्राचीन तमिल सभ्यता की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा राजदंड बताता है।
नई किताब में सेंगोल के अलावा ‘सत्यमेव जयते’, ‘राजधर्म’ और ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ जैसे पारंपरिक विचारों को भी शासन व्यवस्था और सुशासन के संदर्भ में समझाया गया है।
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