सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नाट्यशास्त्रीय 21 दिवसीय कार्यशाला में प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी ने नाट्यशास्त्र की दृष्टि से नायक और नायिकाओं के लक्षणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रमुख नाटकों के नायकों और नायिकाओं को शास्त्रीय लक्षणों से समझाया।

दूसरे सत्र में चिन्मयी और श्यामक मुखर्जी ने प्रयोग के साथ नाटक में संगीत की आवश्यकता का प्रतिपादन किया। उन्होंने कहा कि संगीत के बिना नाटक पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने विभिन्न रसों के साथ संगीत योजना को समझाया। उन्होंने बताया कि तन्तु (तार से बने) सुषिर (हवा वाले) अवनद्ध (ताल वाले) और घन वाद्य नाट्य में रस सृष्टि करते हैं। प्राचीन भारत में अनेक प्रकार के वाद्य यन्त्र थे, जिनमें से कुछ आज भी प्रचलित हैं। संगीत और अभिनय के तारतम्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने प्रतिभागियों को अभिनय में संगीत के योगदान को समझाया।
#नाट्यशास्त्र_कार्यशाला #नायक_नायिका #संगीत_चर्चा #शास्त्रीय_नाटक #रंगमंच_शिक्षा #सांस्कृतिक_कार्यक्रम #भारतीय_नाट्यकला