सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में 8 अक्टूबर को गोवा स्थित उनके आवास पर कार्डियक अरेस्ट के बाद निधन हो गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दिया गया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। अस्पताल ने बताया कि मौत का सटीक कारण पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट हो सकता है।

CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation ऐसी आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति अचानक बेहोश हो जाए और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो। इसका उद्देश्य छाती पर दबाव देकर शरीर और खासकर मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह बनाए रखना होता है, जब तक मेडिकल मदद या AED उपलब्ध न हो जाए।

वयस्क व्यक्ति में CPR देते समय व्यक्ति को समतल और सख्त सतह पर लिटाकर छाती के बीच में दोनों हाथों से तेज और लगातार दबाव दिया जाता है। छाती को करीब 5-6 सेंटीमीटर दबाते हुए प्रति मिनट 100-120 बार कंप्रेशन की सलाह दी जाती है। प्रशिक्षित व्यक्ति 30 कंप्रेशन के बाद 2 रेस्क्यू ब्रीद दे सकता है; प्रशिक्षण न होने पर केवल छाती दबाते रहना भी मददगार है। कार्डियक अरेस्ट में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसलिए तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाना और उपलब्ध होने पर AED का इस्तेमाल करना जरूरी है। CPR व्यक्ति को निश्चित रूप से बचाने की गारंटी नहीं देती, लेकिन समय पर शुरू होने पर जीवित बचने की संभावना बढ़ा सकती है।


Hashtags: #Health #Bhopal #Cpr #एनएन #टवर #आईट #उनक #सकत #Cardiopulmonary #ननपट