सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को बहु-विषयक ज्ञान प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह बात अपर मुख्य सचिव (एसीएस) राजन ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा प्रणाली को भी समय के साथ विकसित होना आवश्यक है। नई शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें विभिन्न विषयों के ज्ञान से जोड़कर समग्र विकास का अवसर प्रदान करती है। राजन ने कहा कि आज के दौर में एक ही विषय की जानकारी पर्याप्त नहीं है। विज्ञान, तकनीक, सामाजिक विज्ञान, कला और प्रबंधन जैसे विभिन्न क्षेत्रों की समझ विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करती है। नई शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य भी यही है कि विद्यार्थी बहु-विषयक अध्ययन के माध्यम से व्यापक दृष्टिकोण विकसित करें और अपनी रुचि के अनुसार विषयों का चयन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के तहत शिक्षण पद्धतियों में भी परिवर्तन किया गया है। अब शिक्षण को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित और शोध उन्मुख बनाया जा रहा है। इससे विद्यार्थियों की रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता का विकास होगा। साथ ही डिजिटल तकनीक और आधुनिक शिक्षण साधनों के उपयोग से शिक्षा को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने का प्रयास किया जा रहा है। राजन ने कहा कि नई शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी प्रेरित करती है। इससे युवा न केवल नौकरी की तलाश करने वाले बनेंगे, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले भी बन सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को सही दिशा देने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई शिक्षा व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन से विद्यार्थियों में ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास का विकास होगा। इससे देश को ऐसे सक्षम और जागरूक युवा मिलेंगे जो भविष्य के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

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