सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मैसूर दशहरा: 54 वर्षीय प्रशांत ने पहली बार उठाया 750 किलो का सुनहरा हौदा

मैसूर। कर्नाटक के मैसूर में 11 दिनों तक चले दशहरा उत्सव का समापन बुधवार, 21 अक्टूबर को भव्य जंबू सवारी के साथ हुआ। इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण 54 वर्षीय हाथी प्रशांत रहा, जिसने पहली बार लगभग 750 किलोग्राम वजन वाला सुनहरा हौदा अपनी पीठ पर उठाया। इस हौदे में देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा विराजमान थी। हजारों लोगों ने इस ऐतिहासिक जुलूस को देखने के लिए सड़कों के किनारे जुटकर उत्सव का आनंद लिया। मैसूर दशहरा को कर्नाटक का राज्य उत्सव ‘नाडा हब्बा’ कहा जाता है। इसकी परंपरा वर्ष 1610 से जुड़ी है, जब वाडियार वंश के राजा वाडियार प्रथम ने इसे शुरू किया था। इस उत्सव की ऐतिहासिक जड़ें विजयनगर साम्राज्य की दशहरा परंपराओं से भी जुड़ी हैं। समय के साथ राजशाही का दौर समाप्त हो गया, लेकिन जंबू सवारी की परंपरा आज भी कायम है।

क्या है सुनहरे हौदे की खासियत? करीब 750 किलोग्राम वजन वाले इस हौदे को ‘अंबारी’ भी कहा जाता है। इसकी लकड़ी की संरचना पर लगभग 80 किलोग्राम सोना चढ़ा होने की जानकारी दी गई है। पहले मैसूर के महाराजा इसी हौदे पर बैठकर जुलूस में शामिल होते थे। अब इसमें देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पांच किलोमीटर लंबा जुलूस जंबू सवारी मैसूर महल से शुरू होकर लगभग पांच किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बन्नीमंटप पहुंची। जुलूस में सजे-धजे हाथियों, लोक कलाकारों, सांस्कृतिक दलों और विभिन्न जिलों की झांकियों ने भाग लिया। इस बार दूसरे राज्यों के सांस्कृतिक दलों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं। समारोह के दौरान 21 तोपों की सलामी ने आयोजन की भव्यता बढ़ाई।

प्रशांत के साथ कावेरी और रूपा नाम के प्रशिक्षित सहायक हाथी भी चले। वहीं, अभिमन्यु ने निशाने हाथी की भूमिका निभाई। मैसूर दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि कर्नाटक की ऐतिहासिक विरासत, कला और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। प्रशांत की पहली हौदा सवारी ने इस वर्ष के समारोह को एक खास पहचान दी और सदियों पुरानी परंपरा को नई पीढ़ी के सामने प्रस्तुत किया।


Hashtags: #NationalIndia #Bhopal #दशहर #पहल #750 #नहर #एनएन #टवर #आईट #मैसूरदशहरा54वर्षीय