सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई हो चुकी है, लेकिन इस बार बारिश के असमान वितरण ने कई इलाकों में पानी और कृषि संकट की चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, देश के करीब 51 प्रतिशत हिस्से में सूखे जैसी परिस्थितियां बनी हैं। वहीं कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश दर्ज हुई, जबकि कई इलाकों में लंबे समय के औसत की तुलना में बारिश काफी कम रही।
मानसून के दौरान बारिश की कमी का असर जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट में केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि 178 प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का करीब 70.67 प्रतिशत पानी ही उपलब्ध है। पिछले साल की तुलना में यह स्तर कम बताया गया है। दक्षिण भारत के जलाशयों में भी सामान्य से कम पानी दर्ज होने की बात सामने आई है।
कम जलस्तर का असर सिंचाई और पनबिजली उत्पादन पर पड़ सकता है। मराठवाड़ा, विदर्भ, पश्चिमी मध्य प्रदेश और गुजरात के कुछ गैर-सिंचित क्षेत्रों में आने वाले महीनों में पेयजल और कृषि संबंधी दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में अधिक बारिश से बाढ़, जलभराव और फसलों को नुकसान जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इस तरह मानसून की विदाई के बाद चुनौती केवल बारिश की कुल मात्रा नहीं, बल्कि उसके असमान वितरण और जल संसाधनों पर पड़े प्रभाव की भी है।
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