सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल :राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता को लेकर बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह जीने का समय है, मरने का नहीं। हर नागरिक के भीतर राष्ट्र के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना होना अनिवार्य है। भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश को तोड़ने वाली और नफरत फैलाने वाली भाषा भारत की संस्कृति और परंपरा के खिलाफ है।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा देश है, लेकिन इसकी एकता इसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने चेताया कि ‘तेरे टुकड़े होंगे’ जैसी भाषा समाज में विभाजन पैदा करती है और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं है। भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र के सम्मान, सुरक्षा और प्रगति के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
भागवत ने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे देश निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। शिक्षा, सेवा, अनुशासन और सामाजिक समरसता के माध्यम से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि आलोचना हो सकती है, मतभेद भी हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र विरोधी सोच और भाषा को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
RSS प्रमुख के इस बयान को मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक माहौल में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके संदेश का उद्देश्य लोगों में राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना और समाज को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना बताया जा रहा है।
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