सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : देश में रोजगार उपलब्ध कराने वाली प्रमुख योजना मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। पिछले 5 वर्षों में मनरेगा के 4.43 करोड़ जॉब कार्ड डिलीट किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा नाम बिहार से करीब 1 करोड़ हटाए गए हैं, जो देश में सबसे अधिक है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जॉब कार्ड हटाने की वजहों में फर्जी कार्ड, डुप्लीकेट एंट्री, मृत्यु, प्रवास और लंबे समय से काम न करना शामिल है। टॉप 6 राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल भी इस सूची में प्रमुख रूप से शामिल हैं, जहां लाखों जॉब कार्ड रद्द किए गए।
सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मनरेगा में पारदर्शिता बढ़ाना और वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचाना है। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि बड़े पैमाने पर जॉब कार्ड हटने से ग्रामीण गरीबों और मजदूरों को रोजगार से वंचित किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जॉब कार्ड डिलीशन के साथ-साथ नए पात्र लाभार्थियों को जोड़ना भी उतना ही जरूरी है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर न पड़े। मनरेगा देश के करोड़ों मजदूरों के लिए आजीविका का अहम साधन है और इससे जुड़े आंकड़े नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।