सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हल्की चोट में भी टूटती है हड्डी, ऑस्टियोपोरोसिस हो सकता है कारण
कभी-कभी मामूली चोट लगने, फिसलकर गिरने या सामान्य गतिविधि के दौरान भी हड्डी टूट सकती है। ऐसी स्थिति को केवल उम्र बढ़ने का असर समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके पीछे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) नाम की बीमारी हो सकती है, जिसमें हड्डियां कमजोर और कम घनी हो जाती हैं। इससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है, खासकर बुजुर्गों में।
क्या है ऑस्टियोपोरोसिस? ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी स्थिति है, जिसमें हड्डियों का घनत्व और उनकी मजबूती कम होने लगती है। स्वस्थ हड्डियां लगातार टूटने और दोबारा बनने की प्राकृतिक प्रक्रिया से गुजरती हैं। जब पुरानी हड्डी के टूटने की प्रक्रिया नई हड्डी बनने की तुलना में तेज हो जाती है, तो हड्डियां कमजोर पड़ सकती हैं। शुरुआती चरण में इस बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को इसका पता तब चलता है, जब मामूली गिरने या हल्की चोट से कलाई, कूल्हे या रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर हो जाता है।
किन लोगों में बढ़ता है खतरा? उम्र बढ़ने के साथ ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ सकता है। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने से हड्डियों का क्षरण तेज हो सकता है। इसके अलावा कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव, धूम्रपान, अत्यधिक शराब का सेवन, कम वजन और परिवार में इस बीमारी का इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकते हैं। कुछ बीमारियों और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं के इस्तेमाल से भी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में जोखिम के कारण अलग-अलग हो सकते हैं।
लक्षणों को कैसे पहचानें? ऑस्टियोपोरोसिस अक्सर बिना किसी शुरुआती चेतावनी के बढ़ता है। इसके संभावित संकेतों में मामूली चोट से फ्रैक्चर होना, समय के साथ लंबाई कम होना, पीठ में लगातार दर्द और रीढ़ की हड्डी में दबाव के कारण शरीर का आगे की ओर झुकना शामिल हो सकता है। इन लक्षणों के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
जांच और इलाज कैसे होता है? हड्डियों की मजबूती का आकलन करने के लिए डॉक्टर जोखिम के आधार पर बोन मिनरल डेंसिटी की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इसके लिए डीएक्सए (DXA) स्कैन का इस्तेमाल किया जाता है। जांच के परिणाम और मरीज की स्थिति के अनुसार उपचार तय किया जाता है। इलाज में कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा, वजन सहन करने वाले व्यायाम, संतुलित आहार और जरूरत पड़ने पर हड्डियों को मजबूत करने वाली दवाएं शामिल हो सकती हैं। सप्लीमेंट या दवाएं डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए।
हड्डियों को मजबूत रखने के उपाय दूध, दही, पनीर, रागी और कैल्शियम युक्त अन्य खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना उपयोगी हो सकता है। नियमित पैदल चलना, संतुलन बेहतर करने वाले व्यायाम, धूम्रपान से बचना और गिरने से बचाव के उपाय भी महत्वपूर्ण हैं। यदि मामूली चोट से फ्रैक्चर हो जाए या बार-बार हड्डियां टूटें, तो चिकित्सकीय जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
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