सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से अब चिकित्सा जगत कई चमत्कार कर रहा है। अब छोटे से गांवों और कस्बों में भी अच्छे चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हैं। दूर-दराज के इलाकों से लोगों को बीमारियों के इलाज के लिए, हजारों किलोमीटर दूर जाने की जरूरत नहीं है। शहर में बैठे-बैठे रोबोटिक सर्जन अपनी गांवों तक विशेषज्ञता का लाभ दे रहे हैं। यह सब संभव हो पा रहा है टेलिकम्युनिकेशन की तकनीक से ।एमसीयू में आयोजित टेड टॉक में के सत्र की विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर ने ये बातें कहीं। डॉक्टर भावे ने सर्जरी विदाउट बॉर्डर विषय पर दिए, अपने उद्बोधन में कई दिलचस्प जानकारी साझा की। उन्होंने विश्व की पहली टेलीसर्जरी से लेकर अब भारत में चिकित्सा जगत में हो रहे आधुनिकतम बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम कितने ही आगे बढ़ जाएं लेकिन एक डॉक्टर के अनुभव, विवेक और सर्जरी के समय निर्णय लेने की क्षमता का स्थान टेक्नोलॉजी नहीं ले सकती फिर भी जो कुछ रोबोटिक काम भारत में हो रहा है वह अचरज के साथ गर्व का भी विषय है। उन्होंने उदाहरण दिया कि अगर दूरस्थ सीमा पर हमारा कोई सैनिक घायल हो जा, जहाँ तुरंत और तत्काल डॉक्टर नहीं पहुँच सकता है तो ड्रोन कैमरा के माध्यम से सर्जरी संभव है। डॉ. प्रिया ने श्रोताओं में शामिल छात्रों की जिज्ञासा भी शांत की। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब डॉक्टर भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़कर मरीज को सरल शब्दों में ट्रीटमेंट और टरमिनोलॉजी आदि की जानकारी दे रहे हैं लेकिन मरीज की भी जिम्मेदारी है कि वह चिकित्सा शब्दावली को जानने का प्रयास करें क्योंकि एआई के माध्यम से अब सब कुछ जानना आसान हो गया है। इस कार्यक्रम के दूसरे सत्र में प्रोफेसर दिवाकर शुक्ला ने इंडियन आर्ट आफ स्टोरी टेलिंग विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी कहानी को कहने के लिए बहुत से ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती। भारत में स्टोरी टेलिंग के हजारों तरीके हैं। हम भारतीय कहानियों को अपने जीवन में जीते हैं। ये कहानियां कभी खत्म नहीं होती। यहां के लोग, उनकी संस्कृति और कला में हजारों कहानियां मिलती है। भारतीय घरों में रोज बनाए जाने वाली रंगोली या अल्पना में भी कहानियां होती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय कहानियां बहुत प्रासंगिक होती हैं। भारत की कलाओं के जो पैटर्न हमें मिलते हैं उनकी अपनी एक विशिष्ट ऐतिहासिक श्रृंखला होती है। वर्ली आर्ट का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि गौर से देखने पर मालूम होता है कि उसमें मानवीय जीवन की गतिविधियां और प्रकृति की नैसर्गिकता दिखती है। उसमें दिखने वाली परंपराएं और प्रतीक लोक कलाकारों और महिलाओं द्वारा बनाए जाते हैं। उन्होंने कहा भारतीय कला का एक अपना विशिष्ट सौंदर्य है। हमें कहा जाता है कि हम अक्सर अपने गांव में जाएं उन्हें समझ वहां की संस्कृति को देखें तो उससे हमें बहुत सी चीज समझ आती हैं। इस सब को अनुभव करते हुए हम आसानी से कहना कहानी कहना सीख सकते हैं। चीजों के घटते रहने को देखना हमें कई चीजें सिखाता है। संदर्भ में ही देखे तो युवाओं को किसी औपचारिक लेक्चर के बजाय मेंटरिंग पसंद आती है। वे इसमें बेहतर महसूस करते हैं। रामायण और महाभारत की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन कथाओं के भीतर अनेकों कहानियां होती है औ हर एक कहानी बिल्कुल अलग होती है। यही कारण है कि रामायण और महाभारत के कई प्रकार भारत ही नहीं दुनिया भर में मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा बेहद विराट और समृद्ध है। यह हमारी चेतना में स्थापित है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार उपवास और उनसे संबंधित कथाओं के श्रोता भी उसके पात्र बन जाते हैं यह भारत की कहानी कहने की कला का ही प्रभाव है। उन्होंने जनजातीय संस्कृतियों को विशिष्ट बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति बेहद शक्तिशाली है। अगर हम इसे समझें और जानें तो इससे जुड़ी कहानियों को भी जान सकते हैं। आज कमर्शियल मीडिया भारत की लोक कथाओं से प्रेरित होकर कहानियों को कह रहा है। स्टोरी टेलिंग की आर्ट के बारे में उन्होंने कहा कि ध्यान रखें कि अगर हमारी कहानी कृत्रिम होगी तो उन्हें सुनने और समझने वालों को आनंद नहीं आएगा। हर कहानी सच्ची होनी चाहिए और उसमें घटनाएं अपने प्राकृतिक स्वरूप में उसमें नजर आनी चाहिए। एक अन्य सत्र में वरिष्ठ पत्रकार मनीष दीक्षित ने सच की तलाश में एक रिपोर्टर की जिम्मेदारी विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि किसी भी पत्रकार तक कोई खबर पत्रकार तक चलकर नहीं आती है। खबर के लिए बहुत प्रयत्न करने होते हैं। याद रखें कि अगर कोई खबर अगर आप तक खुद चलकर आती है तो भी उसे जांचे और उसके तथ्यों को गहराई से वेरीफाई करें। हम जिस विषय पर खबर करना चाहते हैं उससे जुड़ी प्रक्रियायों को गहराई से समझना आवश्यक होता है। बिना तथ्यों और प्रक्रियाओं को समझे खबर करने से हमारी और हमारे संस्थान की साख दांव पर लग जाती है। पत्रकारिता में सूत्रों का खासा महत्व है। इसलिए एक पत्रकार को अपने सोर्स का ख्याल रखना चाहिए उनका दिल जीतना चाहिए। सोर्स कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता। सोर्स लगातार डेवलप करते रहना चाहिए।
पत्रकारिता के टूल्स सीखें उन्होंने कहा कि खबरों के तथ्यों की पुष्टि करना जरूरी है। कई बार उसे क्रॉस चैक करना चाहिए। ऐसी खबरें जरूर करें जो आपको याद रहे या आपकी खबर एक यादगार स्टोरी बने। उन्होंने कहा कि पत्रकार को लगातार काम करना चाहिए और अलग-अलग टूल्स का इस्तेमाल सीखना चाहिए। कई बार उसे सवाल पूछने के तरीकों पर भी गौर करना चाहिए। एक पत्रकार को उसके काम पर लोगों की बातों बजाय अपने कामकाज पर ध्यान देना चाहिए। सीटीसी के बजाय क्यूरोसिटी पर करें काम उन्होंने कहा कि पत्रकार का काम और उसकी खबरें ही उसे आगे बढ़ाती हैं। उन्होंने बजट प्रशासन राजनीति की खबरों के उदाहरण देकर बताया कि जोश में रहते हुए भी परिणाम की चिंता करते हुए काम करना चाहिए। पत्रकारिता के विद्यार्थियों से उन्होंने कहा कि एक पत्रकार को सीटीसी के बजाय क्यूरोसिटी पर काम करना चाहिए। अच्छी स्टोरीज पर तसल्ली से करें काम उन्होंने कहा कि पत्रकार को अपनी स्किल्स, सोर्स और भरोसे पर काम करते रहना चाहिए। पत्रकारिता करते हुए निश्चित तौर पर चुनौतियां भी आती हैं। कई बार कानूनी चुनौतियां भी मिलती हैं। इसलिए खबरें करते समय संबंधित तथ्यों से जुड़े दस्तावेज अपने पास रखना चाहिए। पत्रकारिता करने का सार यह है कि आपके पास सूचना होनी चाहिए और उससे जुड़े हुए दस्तावेज होने चाहिए। दीक्षित ने कहा कि सोशल मीडिया खबरों का प्रमुख स्रोत है इसमें क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बहुत बढ़ गई है। इसलिए अपने स्किल पर बहुत काम करने की जरूरत है। जल्दबाजी में एक्सक्लूसिव खबरों के पीछे भागने से अच्छा है कि अच्छी मेहनत कर एक बेहतरी खबर की जाए। इस अवसर पर विश्वविद्यालय में टेड टाक के आयोजन पर कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने विभाग को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह एक इंटरनेशनल प्लेटफार्म के साथ जुड़कर इस तरह का नवाचार अनुकरणीय है। कार्यक्रम में कुलसचिव पी. शशिकला ने स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में सत्रों का संचालन डॉ जया सुरजानी ने किया।इस अवसर पर विभागों के प्रमुख, सहित प्राध्यापक भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम का संयोजन एवं अतिथियों का आभार विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के प्रमुख डा. पवित्र श्रीवास्तव ने किया।
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