सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मजरूह सुल्तानपुरी हिंदी सिनेमा के उन गीतकारों में शामिल हैं, जिन्होंने कई पीढ़ियों के लिए यादगार गीत लिखे। उनका असली नाम असरार उल हसन खान था। उन्होंने फिल्मी गीतों के साथ-साथ उर्दू शायरी में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनके लिखे ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’, ‘पहला नशा’ और कई अन्य गीत आज भी लोकप्रिय हैं।
मजरूह का जीवन सिर्फ गीत लेखन तक सीमित नहीं था। 1949 में मजदूर आंदोलन के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों पर तीखी कविता पढ़ी। रिपोर्टों के अनुसार, इस कविता के बाद उन्हें मुंबई की आर्थर रोड जेल में दो साल के लिए बंद किया गया। उनसे माफी मांगने के लिए भी कहा गया, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर माफी मांगने से इनकार कर दिया। उनके साथ अभिनेता बलराज साहनी को भी जेल भेजे जाने की जानकारी मिलती है।
फिल्मी करियर में मजरूह ने ‘शाहजहां’ से शुरुआत की और बाद में ‘अंदाज’, ‘सीआईडी’, ‘गाइड’, ‘ज्वेल थीफ’ जैसी फिल्मों के लिए गीत लिखे। उन्होंने समय के साथ अपनी लेखनी को नई पीढ़ी के अनुरूप भी ढाला। आमिर खान की फिल्म ‘कयामत से कयामत तक’ का ‘पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा’ और ‘जो जीता वही सिकंदर’ का ‘पहला नशा’ इसके उदाहरण हैं। मजरूह सुल्तानपुरी को 1994 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका निधन 24 मई 2000 को हुआ, लेकिन उनकी शायरी और फिल्मी गीत आज भी भारतीय सिनेमा की विरासत का हिस्सा हैं।
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