सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुंबई, 22 अक्टूबर 2026। हिंदी सिनेमा में जब दमदार संवाद लेखन, शानदार कॉमिक टाइमिंग और यादगार खलनायकी की बात होती है, तो कादर खान का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अभिनेता, पटकथा लेखक और संवाद लेखक के रूप में उन्होंने फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। 22 अक्टूबर 1937 को अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे कादर खान की आज 89वीं जयंती है। उनका जीवन गरीबी, संघर्ष, मेहनत और असाधारण प्रतिभा की कहानी रहा। गरीबी में बीता बचपन, मस्जिद के पास मांगनी पड़ी भीख कादर खान का परिवार उनके बचपन में ही मुंबई आ गया था। कमाठीपुरा की तंग बस्ती में उनका बचपन कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बीच गुजरा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परिवार की मदद के लिए उन्हें कभी-कभी मस्जिद के पास भीख भी मांगनी पड़ती थी। इन मुश्किलों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और सिविल इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। फिल्मों में पहचान बनाने से पहले वह मुंबई के एमएच साबू सिद्दीक कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग के अध्यापक भी रहे।

कब्रिस्तान में डायलॉग बोलते हुए मिला मौका कादर खान को बचपन से ही अभिनय और संवाद बोलने का शौक था। वह दिनभर देखी-सुनी घटनाओं को दोहराते और शाम को एक यहूदी कब्रिस्तान में जाकर अभिनय का अभ्यास करते थे। एक दिन अभिनेता अशरफ खान ने उन्हें वहां संवाद बोलते हुए देखा। उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्होंने कादर खान को नाटक में काम करने का अवसर दिया। यही मुलाकात उनके अभिनय सफर का अहम पड़ाव बनी। लेखक के रूप में बनाई अलग पहचान कादर खान ने 1970 और 1980 के दशक में संवाद लेखक के रूप में खास मुकाम हासिल किया। ‘जवानी दीवानी’, ‘रोटी’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘लावारिस’, ‘नमक हलाल’ और ‘शराबी’ जैसी फिल्मों से उनका लेखन दर्शकों तक पहुंचा। उन्होंने अमिताभ बच्चन की कई चर्चित फिल्मों के संवाद लिखे। बाद के वर्षों में गोविंदा और निर्देशक डेविड धवन के साथ उनकी जोड़ी ने कॉमेडी फिल्मों में भी खूब लोकप्रियता हासिल की।

‘सर जी’ नहीं कहा, अमिताभ से दूर हो गई दोस्ती कादर खान ने एक पुराने इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन के साथ अपने रिश्तों में आई दूरी का किस्सा भी साझा किया था। उनके मुताबिक, वह अमिताभ को हमेशा ‘अमित’ कहकर बुलाते थे, क्योंकि दोनों के बीच दोस्ताना संबंध थे। एक निर्माता ने उनसे कहा कि अब अमिताभ को ‘सर जी’ कहकर संबोधित करना चाहिए। कादर खान ने ऐसा करने के बजाय पुराना संबोधन ही बनाए रखा। उन्होंने बताया था कि इसके बाद दोनों के बीच बातचीत और नजदीकी कम होती गई। यह कादर खान के अपने अनुभव पर आधारित बयान था; इस घटनाक्रम पर दोनों पक्षों की अलग-अलग सार्वजनिक व्याख्याओं को ध्यान में रखना जरूरी है। हिंदी सिनेमा में हमेशा याद किए जाएंगे कादर खान का निधन 31 दिसंबर 2018 को कनाडा में हुआ। अपने पीछे वह सैकड़ों फिल्मों से जुड़ा काम, यादगार किरदार और लोकप्रिय संवादों की विरासत छोड़ गए। उनकी जयंती पर उन्हें याद करना उस कलाकार को सम्मान देना है, जिसने कठिन परिस्थितियों से निकलकर अपनी लेखनी और अभिनय के दम पर हिंदी सिनेमा में अमिट स्थान बनाया।


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