सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने धर्म, आस्था और ईश्वर में विश्वास को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। एक हालिया बातचीत में उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में धर्म इंसान को भावनात्मक सहारा दे सकता है, लेकिन किसी विश्वास से मिलने वाला सुकून यह साबित नहीं करता कि वह विश्वास सच भी है। अपनी बात समझाने के लिए जावेद अख्तर ने कारोबारी एलॉन मस्क का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति यह मान ले कि एलॉन मस्क उसका भाई है और अगले महीने उसे अरबों डॉलर भेजने वाला है, तो यह कल्पना उसे खुशी और सुरक्षा का एहसास दे सकती है। लेकिन केवल विश्वास कर लेने से वह बात वास्तविक नहीं हो जाती।

जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि ज्यादातर लोग उसी धर्म को मानते हुए बड़े होते हैं, जिसमें उनका जन्म हुआ होता है। इसी संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि करीब 99 प्रतिशत लोग उसी धर्म में मरते हैं, जिसमें वे पैदा हुए थे। उन्होंने लोगों से अपनी मान्यताओं को तर्क और स्वतंत्र सोच के आधार पर परखने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग धर्मों को एक जैसा बताना सही नहीं है, क्योंकि उनकी मान्यताएं और विचार अलग हैं। जावेद अख्तर लंबे समय से धर्म, तर्क और नास्तिकता जैसे विषयों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं।


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