सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : इजराइल में हमास हमले के 3 साल बाद चुनाव, नेतन्याहू के सामने चुनौती
इजराइल की राजनीति में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए आगामी चुनाव बड़ी चुनौती बन सकते हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था, सरकार की जवाबदेही और युद्ध से जुड़े फैसलों को लेकर नेतन्याहू सरकार पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में चुनावी राजनीति में विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ी है और मतदाताओं के रुख पर सबकी नजर है। कई चुनावी सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में मुश्किल होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, अलग-अलग सर्वेक्षणों के नतीजों में अंतर हो सकता है और चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना बनी रहती है। फिलहाल किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत मिलने की स्थिति सुनिश्चित नहीं मानी जा सकती।
चुनाव में सुरक्षा और जवाबदेही प्रमुख मुद्दे 7 अक्टूबर 2023 के हमले में हुई सुरक्षा चूक नेतन्याहू के विरोधियों के लिए प्रमुख चुनावी मुद्दा बनी हुई है। विपक्षी नेता गादी आइज़ेनकोट समेत कई आलोचक सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वहीं, नेतन्याहू के समर्थक उनकी सुरक्षा नीतियों और सैन्य अभियानों का बचाव करते हैं। सर्वेक्षणों के मुताबिक, हमास हमले की बरसी ने मतदाताओं के बीच पहले से मौजूद राजनीतिक मतभेदों को और मजबूत किया है। बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। हालिया सर्वेक्षणों में नेतन्याहू का गठबंधन और उनके विरोधी खेमे दोनों इस आंकड़े से पीछे दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में चुनाव के बाद छोटे दलों और अरब पार्टियों का समर्थन सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को मतदान होना निर्धारित है। यह चुनाव न केवल नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य, बल्कि हमास हमले के बाद देश की सुरक्षा नीति और आगामी सरकार की दिशा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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