सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम और युद्ध समाप्त करने को लेकर जारी तनाव के बीच अपना रुख सख्त कर दिया है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने स्पष्ट कहा है कि देश का संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका जब तक ईरान की शर्तें पूरी करने और भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक बातचीत आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। ईरान का यह बयान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा के दौरान सामने आया है।
‘एक ग्राम संवर्धित यूरेनियम भी बाहर नहीं जाएगा’ मोहसेन रेजाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि संवर्धित यूरेनियम का एक ग्राम भी ईरान से बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने इसे ईरानी जनता की राष्ट्रीय संपत्ति बताया, जिसका उपयोग देश के भीतर ही किया जाना चाहिए। रेजाई के मुताबिक, अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने से पहले भरोसा बहाली जरूरी है और इसकी शुरुआत ईरान की शर्तों को पूरा करने से होनी चाहिए।
आसिम मुनीर की मध्यस्थता से बातचीत की कोशिश पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा रुकी हुई शांति वार्ता को दोबारा शुरू कराने के प्रयास में तेहरान पहुंचे हैं। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर कलीबाफ सहित वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में क्षेत्रीय हालात और मध्यस्थता के प्रयासों पर चर्चा हुई। हालांकि, ईरान के ताजा बयान से स्पष्ट है कि बातचीत फिर शुरू कराने की राह में गंभीर अड़चनें बनी हुई हैं।
अमेरिका से ईरान की प्रमुख मांगें ईरानी नेताओं ने संकेत दिया है कि वार्ता आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका को कई शर्तें पूरी करनी होंगी। इनमें ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी समाप्त करना, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के विभिन्न मोर्चों पर शत्रुता रोकना शामिल है। ईरान ने कहा है कि जब तक उसकी मांगों पर ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक अमेरिका पर भरोसा बहाल करना मुश्किल होगा।
परमाणु कार्यक्रम बना विवाद का केंद्र अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी संवर्धन क्षमता में महत्वपूर्ण कमी करे और परमाणु हथियार बनाने की किसी भी संभावना को रोका जाए। दूसरी ओर, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण उद्देश्यों से जुड़ा बताता है और परमाणु हथियार बनाने की मंशा से इनकार करता है। ईरान के ताजा रुख ने अमेरिका के साथ संभावित समझौते को और जटिल बना दिया है। अब पाकिस्तान की मध्यस्थता और दोनों देशों की ओर से भरोसा बहाल करने के प्रयासों पर क्षेत्रीय शांति की संभावनाएं निर्भर करेंगी।
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