सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव में होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर रणनीतिक संघर्ष का केंद्र बन गया है। ईरान समुद्री मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए निगरानी बढ़ा रहा है और जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दे रहा है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान पर सैन्य और आर्थिक दबाव बनाए हुए है। हालिया घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि दोनों देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं।
ट्रंप पर दबाव बनाने की ईरान की रणनीति अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की 14 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाने के तरीकों में बदलाव किया है। ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि तेहरान उन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ाना चाहता है, जिन्हें वह अपने प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाला मानता है।
इस रणनीति के पीछे समुद्री परिवहन को प्रभावित करके तेल की कीमतों पर दबाव बनाए रखने और अमेरिकी प्रशासन को बातचीत में रियायत देने के लिए मजबूर करने का उद्देश्य बताया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से पहले युद्ध का आर्थिक प्रभाव राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, ईरान की रणनीति से अमेरिकी चुनावों के नतीजों पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
होर्मुज पर अभी किसका नियंत्रण है? होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। युद्ध से पहले दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इस मार्ग से गुजरता था। वर्तमान स्थिति में इस जलडमरूमध्य पर किसी एक पक्ष का निर्विवाद नियंत्रण कहना सही नहीं होगा। ईरान जहाजों की आवाजाही सीमित करने और अपने प्रतिबंध लागू कराने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना समुद्री मार्ग से तेल और अन्य वस्तुओं के परिवहन को जारी रखने के प्रयास कर रही है।अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इस दावे को खारिज किया है कि जलडमरूमध्य पूरी तरह उसके नियंत्रण में है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि उसकी सेना और क्षेत्रीय सहयोगी समुद्री मार्ग में सक्रिय हैं। इसके बावजूद जहाजों पर हमलों और सुरक्षा संबंधी खतरों के कारण व्यापारिक आवाजाही प्रभावित हो रही है।
तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर होर्मुज में तनाव बढ़ने का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। इस मार्ग से तेल की आपूर्ति बाधित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए ऐसी स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से परिवहन, उत्पादन और महंगाई प्रभावित हो सकती है। समुद्री जहाजों के संचालकों को भी सुरक्षा, बीमा और परिवहन लागत से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यदि हमले और प्रतिबंध जारी रहते हैं, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार पर अनिश्चितता बनी रह सकती है।
आगे क्या हो सकता है? अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता तथा सैन्य गतिविधियां आगे की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण होंगी। ईरान समुद्री मार्ग पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर रहा है, जबकि अमेरिका जहाजों की आवाजाही बनाए रखने और ईरान पर दबाव जारी रखने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और समुद्री मार्ग की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
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