सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तजा ने अपनी भारतीय समकक्ष देवश्री मुखर्जी को पत्र लिखकर इस विवादित संधि को लेकर भारत से बातचीत की इच्छा जताई है। मुर्तजा ने कहा है कि सिंधु जल संधि से लाखों लोग निर्भर हैं और भारत को अपने निलंबन के फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों की सहमति से ही बदला जा सकता है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद 23 अप्रैल 2025 को इस संधि को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया था। इस ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने आतंकियों पर सटीक और त्वरित कार्रवाई की, जिससे पाकिस्तान को सैन्य और कूटनीतिक मोर्चे पर कड़ी चोट लगी। इसके अलावा भारत ने चिनाब नदी पर बगलिहार और सलाल जल विद्युत परियोजनाओं में फ्लशिंग और डिसिल्टिंग का काम भी शुरू कर दिया है।
सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी, जिसमें सिंधु नदी की छह नदियों के पानी का बंटवारा तय किया गया था। इसमें पाकिस्तान को लगभग 70 प्रतिशत और भारत को 30 प्रतिशत पानी का अधिकार मिला था। पाकिस्तान की कृषि और पेयजल की बड़ी हिस्सेदारी इस नदी पर निर्भर है, इसलिए इस संधि के निलंबन से उसे गहरा नुकसान हो रहा है।
हालांकि भारत सरकार ने इस मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। पाकिस्तान ने इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय या विश्व बैंक तक ले जाने की तैयारी की बात कही है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उसे कहीं से राहत मिलना मुश्किल है।
इस विवाद से स्पष्ट होता है कि सिंधु जल संधि के मसले पर भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद गहरा होता जा रहा है और आने वाले समय में इस पर कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।
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