सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : ब्रिक्स सम्मेलन में भारतीय विशेषज्ञों ने एआई और शिल्पकला पर चर्चा की

मॉस्को। ब्रिक्स प्लस फैशन सम्मेलन 2026 में भारतीय विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत के प्रतिनिधियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा पारंपरिक शिल्पकला के बीच संतुलन स्थापित करने पर विचार-विमर्श किया। 28 से 30 सितंबर तक मॉस्को में आयोजित इस सम्मेलन में फैशन उद्योग में तकनीकी बदलाव, रचनात्मकता, सांस्कृतिक पहचान और आधुनिक डिजाइन प्रक्रियाओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता डिजाइनरों की कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक हो सकती है, लेकिन मानवीय कल्पनाशीलता, अनुभव और कलात्मक दृष्टिकोण का महत्व बना रहेगा।

फैशन डिजाइन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका सम्मेलन के दौरान आयोजित चर्चा में विशेषज्ञों ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से नए डिजाइन तैयार करने, कपड़ों के नमूने विकसित करने, फैशन के रुझानों का अनुमान लगाने और रचनात्मक प्रक्रियाओं को तेज करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, डिजाइन की विशिष्टता, सांस्कृतिक मूल्यों और ग्राहकों की भावनात्मक अपेक्षाओं को समझने में मानवीय योगदान महत्वपूर्ण है। भारतीय बिजनेस काउंसिल के अध्यक्ष आकाशदीप सिंह ने कला और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच सहयोग की अवधारणा पर जोर दिया। उनके अनुसार, तकनीक रचनात्मक प्रक्रिया को गति दे सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय और डिजाइन की दिशा तय करने में मनुष्य की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहनी चाहिए।

पारंपरिक शिल्पकला का महत्व बरकरार विशेषज्ञों ने भारतीय हस्तशिल्प, पारंपरिक तकनीकों और स्थानीय सांस्कृतिक पहचान को फैशन उद्योग की महत्वपूर्ण ताकत बताया। चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आधुनिक तकनीकों को अपनाते समय पारंपरिक कौशल और हाथों से किए जाने वाले काम की विशिष्टता को संरक्षित रखना आवश्यक है। फैशन शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के डिजाइनरों को पारंपरिक कलात्मक कौशल के साथ डिजिटल तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का ज्ञान भी प्राप्त करना चाहिए। इससे वे बदलती औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप नए उत्पाद विकसित कर सकेंगे। वैश्विक फैशन उद्योग में नए अवसर सम्मेलन में डिजाइन, डिजिटल प्रौद्योगिकी, निवेश और सांस्कृतिक पहचान के बीच संबंधों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पारंपरिक शिल्पकला का समन्वय फैशन उद्योग में नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर सकता है।

भारतीय विशेषज्ञों की भागीदारी ने वैश्विक मंच पर भारतीय डिजाइन परंपराओं, रचनात्मक कौशल और तकनीकी नवाचार के महत्व को सामने रखा। सम्मेलन में उभरा प्रमुख विचार यह रहा कि फैशन का भविष्य तकनीक और मानवीय रचनात्मकता के सहयोग से आकार लेगा, जिसमें पारंपरिक शिल्पकला की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी।


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