सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संकट के बीच भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए वैकल्पिक रास्तों पर काम कर रहा है। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच सीधे ऊर्जा पाइपलाइन विकल्प की व्यवहार्यता पर विचार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इसका उद्देश्य होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम करना और कच्चे तेल की आपूर्ति को अधिक सुरक्षित बनाना है।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 88 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज के रास्ते समुद्री परिवहन में व्यवधान के कारण तेल आपूर्ति की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, संकट से पहले भारत के करीब 45 प्रतिशत कच्चे तेल आयात होर्मुज मार्ग से आते थे, हालांकि वैकल्पिक स्रोतों के जरिए गैर-होर्मुज आपूर्ति का हिस्सा बढ़ाया गया है।
भारत और UAE ने ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए रणनीतिक कदम भी उठाए हैं। मई 2026 में दोनों देशों के बीच रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार, फुजैराह में कच्चे तेल के भंडारण और LPG आपूर्ति से जुड़े सहयोग की घोषणा हुई थी। हालांकि, पाइपलाइन परियोजना को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। जून 2026 में पेट्रोलियम मंत्रालय ने गुजरात से ओमान और अन्य खाड़ी देशों तक प्रस्तावित डीपवॉटर पाइपलाइन संबंधी मीडिया रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा कोई प्रस्ताव उसके विचाराधीन नहीं है।
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