सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ दिल्ली : भारत और ताजिकिस्तान आलू अनुसंधान, खेती, गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन, तकनीक आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। इस सिलसिले में ICAR-Central Potato Research Institute (CPRI), Shimla के वैज्ञानिकों और Tajikistan की LCC AKOMA के प्रतिनिधियों के बीच वर्चुअल बातचीत हुई। इस पहल में New Delhi स्थित Embassy of Tajikistan ने सहयोग दिया।
यह संवाद Department of Agricultural Research and Education और Indian Council of Agricultural Research के निर्देशों के तहत आयोजित किया गया। उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना और कृषि तकनीकों तथा विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को आगे बढ़ाना है।
सहयोग के लिए जिस प्रमुख क्षेत्र की पहचान की गई, वह उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज सामग्री के उत्पादन में एरोपोनिक्स तकनीक है। CPRI निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह के अनुसार, यह तकनीक गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री के तेज गुणन में मदद कर सकती है और बीज-आलू उत्पादन प्रणालियों को मजबूत बना सकती है। ताजिक प्रतिनिधियों ने इस तकनीक और उससे जुड़ी उत्पादन पद्धतियों का व्यावहारिक अनुभव लेने में रुचि जताई।
दोनों पक्षों ने Shimla में CPRI सुविधाओं के लिए ताजिक प्रतिनिधियों के एक्सपोजर विजिट पर भी चर्चा की। प्रस्तावित दौरे से उन्नत अनुसंधान सुविधाओं, एरोपोनिक्स आधारित बीज उत्पादन, आलू फसल प्रबंधन और संस्थान द्वारा विकसित अन्य तकनीकों को समझने का अवसर मिलेगा।
ताजिकिस्तान के कृषि पेशेवरों के लिए विशेष प्रशिक्षण का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका उद्देश्य आधुनिक आलू उत्पादन और बीज तकनीकों में तकनीकी ज्ञान तथा व्यावहारिक कौशल को मजबूत करना है।
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