सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय वन प्रबंध संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार और यूके सरकार के महयोग से वन मानको, प्रमाणन और उत्पाद अनुरेखणीयता पर भारत-यूके ज्ञान विनिमय का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यशाला, कृषि वानिकी क्षेत्र में नकड़ी अनुरेखणीयता और प्रमाणन पर यूके त्वरित जनवायु परिवर्तन के लिए साझेदारी के माध्यम से प्रस्तावित व्यापक कार्य का एक हिस्सा है। कार्यशाला का उद्घाटन मध्य प्रदेश वन विभाग के पीसीसीएफ एवं हॉफ निदेशक असीम श्रीवास्तव, आईआईएफएम के निदेशक के. रविचंद्रन, भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के जन उप महानिरीक्षक अमित आनंद, ब्रिटिश उच्चायोग में जलवायु परिवर्तन नीति प्रमुख ओवेन रॉबर्ट्स और सीआईएफओआर-आईसीआरएएफ के कंट्री डायरेक्टर मनोज डबाम की उपस्थिति में किया गया।

ब्रिटिश उच्चायोग में जलवायु परिवर्तन नीति के प्रमुख ओवेन रॉबर्ट्स ने कहा: “मुझे भारत के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और यूके के जन अनुसंधान के साथ जन प्रबंधन संस्थान में आयोजित कार्यशाला में शामिल होकर खुशी हुई। 2021 में, हम भारत-यूके वन लाझेदारी के माध्यम से वन संरक्षण पर सहयोग कर रहे हैं। यह कार्यशाला स्थायी कृषि वानिकी को बढ़ावा देने के साथ-माथ वन उत्पाद ट्रेसिबिलिटी उपायो को बढ़ावा देने की दिशा में हमारे महयोग में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे छोटे किसानो को लाभ होगा और स्थायी वन प्रबंधन को मजबूती मिलेगी। यूके के वन अनुसंधान के विशेषज्ञ सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों, शिक्षा जगत और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ कार्यशाला में शामिल हुए।
आईआईएफएम के निदेशक ते 12 दिसंबर 2023 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफ एंड बीसी) द्वारा शुरू की गई भारतीय वन एवं काष्ठ प्रमाणन योजना (आईएफडब्ल्यूमीएम) “प्रमाण” का अवलोकन प्रस्तुत किया। वैश्विक स्तर पर। उन्होंने वनों, वनों के बाहर के वृक्षों, साथ ही लकड़ी और गैर-लकड़ी वन उत्पादो के प्रमाणन में नृत्तीय-पक्ष मत्यापन मंत्र के महत्व पर भी जोर दिया।

विचार-विमर्श में विभिन्न हितधारकों के साथ वन प्रमाणन और उत्पाद प्रमाणन प्रणानियों के विकास और कार्यान्वयन में यूके की यात्रा और अनुभव पर ध्यान केंद्रित किया गया और इस बात पर भी चर्चा की गई कि भारत अपने ढाँचो को मजबूत करने के लिए इन अनुभवों का लाभ कैसे उठा सकता है। तकनीकी सत्रों में कई विषयगत क्षेत्रों को शामिल किया गया, जिनमें शामिल हैं:
वन प्रमाणन का समर्थन करने वाले संस्थागत और प्रशासनिक तंत्र तकनीकी मानक और ज़मीनी स्तर पर संचालन प्रमाणन प्रणालियों में छोटे किमानों और स्थानीय ममुदायों का समावेश वैश्विक उचित परिश्रम और स्थिरता आवश्यकताओं को पूरा करने में प्रमाणन की भूमिका कार्यशाला का समापन ब्रेकआउट सत्रों और पैनल चर्चाओं के साथ हुआ, जिसमें यूके के अनुभव से प्राप्त अनुभवी को भारतीय संदर्भ की जरूरतो, परिस्थितियों और आवश्यकताओं के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। पैनलिस्ट में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, अंतरराष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान केंद्र, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक, भारतीय प्लाईवुड एवं पैनल उद्योग महासंघ , ग्रीनलैम और इनक्यूब के प्रतिनिधि शामिल थे। कार्यशाला दोनों देशों के बीच निरंतर तकनीकी महयोग और हितधारकों की निरंतर भागीदारी की आवश्यकता पर आम सहमति के नाथ संपन्न हुई।
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