सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल / उज्जैन : विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के स्वर्ण जयंती सभागार में गणेशोत्सव के पावन अवसर पर आयोजित गणराज कलापर्व 2025 ने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग, विक्रम विश्वविद्यालय, सतत शिक्षा अध्ययनशाला, पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययनशाला तथा मराठी रसिक समूह के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने उपस्थित जनों को महाराष्ट्र के गणेशोत्सव की भव्यता और आत्मीयता का अनुभव कराया।कार्यक्रम का शुभारंभ नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव ने दीप प्रज्वलन कर किया। ‘
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आयोजन का नाम जितना सुंदर है, उसका स्वरूप और वातावरण उतना ही भव्य और मनमोहक दिखाई दे रहा है। गणपति बप्पा के आगमन और स्वागत का दृश्य इतना अद्वितीय रहा मानो पूरा महाराष्ट्र उज्जैन के सभागार में उतर आया हो।
उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, अजीत पवार तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित सभी आयोजकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज ने की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का सशक्त प्रतीक है। ऐसे आयोजन हमें अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस विरासत का स्मरण कराते हैं, जिन्होंने गणेशोत्सव को जनजागरण का माध्यम बनाया था।
सारस्वत अतिथि के रूप में कालिदास अकादमी के संचालक गोविन्द गंधे ने महाराष्ट्र की विशिष्ट संस्कृति और गणेशोत्सव की समाज को जोड़ने वाली परंपरा पर विचार रखे। भूषण नायक के संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में उदय साटम (दिग्दर्शक), दर्शन साटम (गायक), दत्ता चाळके (निवेदन), संदिप कांबळे (नृत्य दिग्दर्शन), कोमल धांडे (गायिका), सचिन घाग (वादक), ज्योति साटम (गायिका) सहित कलाकारों ने महाराष्ट्र की लोककला और भक्ति परंपरा की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का संचालन सुदर्शन आयचित ने किया और अतिथियों का स्वागत पारंपरिक मराठी पगड़ी व शॉल से किया गया। गणेश वंदना से आरंभ हुए इस आयोजन ने दर्शकों को महाराष्ट्र की जीवंत संस्कृति का अनुपम अनुभव कराया।
#विक्रमविश्वविद्यालय #महाराष्ट्रकलापर्व #सांस्कृतिककार्यक्रम #उज्जैन #लोककला