सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस  /  आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल  :  अक्टूबर में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होने वाली है, जिसमें रेपो रेट और अन्य वित्तीय फैसले लिए जाएंगे। रेपो रेट वह दर है जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों को कर्ज देती है। इस रेट में बदलाव का असर सीधे आम जनता की जेब पर पड़ता है।

अगर भारतीय रिजर्व बैंक  रेपो रेट बढ़ाती है, तो बैंक भी अपने कर्ज की ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। इसका मतलब है कि जो लोग होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन पर ब्याज दे रहे हैं, उन्हें ज्यादा रकम चुकानी होगी। वहीं, अगर रेपो रेट घटाई जाती है, तो बैंक अपने लोन पर ब्याज दरें कम कर सकते हैं। इससे आम आदमी की मासिक किस्तें कम होंगी और क्रेडिट आसान हो जाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, रेपो रेट में बदलाव से सिर्फ लोन लेने वाले ही प्रभावित नहीं होते, बल्कि बैंक में जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज पर भी असर पड़ता है। जब रेट कम होती है तो बचत पर मिलने वाला ब्याज थोड़ा घट सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक  का मकसद रेपो रेट बदलकर अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखना और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना होता है। आम आदमी को सलाह दी जाती है कि वे इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपने वित्तीय फैसले लें, जैसे कि नया लोन लेना या निवेश योजना बनाना। अक्टूबर की बैठक के बाद रेपो रेट में बदलाव का असर बैंकिंग लेनदेन और आम आदमी की जेब पर सीधे देखने को मिलेगा।

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