सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय वैज्ञानिकों ने ओटीपी‑हैकिंग (OTP Hacking) को मुश्किल बनाने वाली नई सुरक्षा तकनीक विकसित की है। आईआईएससी (IISc) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सहयोग से तैयार इस प्रणाली में ओटीपी ट्रांसमिशन के दौरान एक अतिरिक्त एन्क्रिप्शन‑लेयर जोड़ी जाती है, जिससे ओटीपी केवल उस पंजीकृत (registered) डिवाइस पर ही डिक्रिप्ट और उपयोग किया जा सकेगा।
नयी तकनीक में प्रत्येक पंजीकृत यूजर‑डिवाइस के लिए एक यूनिक क्रिप्टोग्राफिक की बनाई जाती है, जो ओटीपी जेनरेशन/रिसीव के समय सर्वर‑साइड एन्क्रिप्शन के साथ वेरिफाई होती है। रिसर्च टीम का कहना है कि इस तरीके से मैन‑इन‑द‑मिडल, सिम‑स्वैप और स्मार्टफोन‑क्लोनिंग जैसे आम हमलों के खिलाफ सुरक्षा काफी बढ़ जाएगी। प्रयोगशाला स्तर पर सफल परीक्षण हो चुके हैं और टीम ने बताया कि बैंकिंग, ई‑कॉमर्स और मोबाइल पेमेंट प्लेटफॉर्म में इसे एकीकृत करने की तैयारी है।
शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि तकनीक को मोबाइल‑OEMs के हार्डवेयर‑कीस्टोर और ऑपरेटर‑नेटवर्क की सुरक्षा नीतियों के साथ जोड़ा जाएगा ताकि क्रिप्टो की चोरी या रिवर्स‑इंजीनियरिंग का जोखिम कम रहे। अब अगले चरण में पायलट‑इंटीग्रेशन कुछ बैंकों और पेमेंट‑गेटवे पर किया जाएगा ताकि वास्तविक ट्रैफिक में परफॉर्मेंस, विलंबता और स्केलेबिलिटी का आंकलन हो सके। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि यह समाधान सफल रहा तो आने वाले वर्षों में ओटीपी‑आधारित फ्रॉड की घटना घट सकती है और डिजिटल ट्रांजैक्शन्स और भी सुरक्षित बनेंगे।
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