सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आसपास की आवाजें हमारे जीवन का सामान्य हिस्सा हैं, लेकिन जब यही आवाजें जरूरत से ज्यादा तेज हो जाती हैं, तो सुनने की क्षमता और स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। तेज संगीत, यातायात का शोर, औद्योगिक मशीनें और पटाखों की आवाजें कानों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि इंसान के कान कितनी तेज आवाज सह सकते हैं और किस स्तर पर खतरा बढ़ने लगता है।
कितने डेसीबल पर कानों को नुकसान होता है? आवाज की तीव्रता डेसीबल (डीबी) में मापी जाती है। सामान्य बातचीत लगभग 60 डेसीबल के आसपास होती है, जबकि व्यस्त सड़क पर शोर 80 से 90 डेसीबल या उससे अधिक हो सकता है। लंबे समय तक 85 डेसीबल या उससे अधिक शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ता है। नुकसान का स्तर आवाज की तीव्रता और उसके संपर्क में रहने की अवधि पर निर्भर करता है। लगभग 100 डेसीबल की आवाज में लंबे समय तक रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं, 110 से 120 डेसीबल के आसपास की आवाज कम समय में भी कानों के लिए हानिकारक हो सकती है। बेहद तेज धमाके या पटाखों की आवाज अचानक सुनने की क्षमता घटा सकती है और कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या तेज आवाज से मौत हो सकती है? तेज आवाज से होने वाला सबसे सामान्य गंभीर खतरा सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचना है। अत्यधिक तीव्र ध्वनि से दर्द, कानों में घंटी बजने जैसी अनुभूति और अस्थायी या स्थायी श्रवण हानि हो सकती है। हालांकि, केवल डेसीबल के किसी एक निश्चित स्तर को मनुष्य की मृत्यु का सार्वभौमिक मानक नहीं माना जा सकता। अत्यधिक तीव्र ध्वनि और विस्फोट से उत्पन्न दबाव तरंगें परिस्थितियों के अनुसार शारीरिक चोट पहुंचा सकती हैं, लेकिन मृत्यु का जोखिम केवल आवाज के डेसीबल से तय नहीं होता।
कान सुरक्षित रखने के उपाय तेज शोर वाली जगहों पर कानों की सुरक्षा के लिए ईयरप्लग या ईयरमफ का इस्तेमाल करना चाहिए। हेडफोन की आवाज कम रखें और लगातार सुनने के बीच नियमित अंतराल लें। तेज शोर से दूर जाना और उसके संपर्क में बिताया समय कम करना भी उपयोगी है। यदि तेज आवाज के बाद कानों में लगातार घंटी बजने लगे, सुनाई कम देने लगे या दर्द हो, तो चिकित्सकीय सलाह लें। अचानक सुनने की क्षमता कम होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
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