सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बवासीर जैसी आम समस्या को लेकर लोग कई बार योग्य चिकित्सक से सलाह लेने के बजाय घरेलू नुस्खों या बिना चिकित्सकीय योग्यता वाले लोगों की सलाह पर इलाज शुरू कर देते हैं। कानपुर की हालिया घटना ने ऐसे प्रयोगों के गंभीर खतरे को सामने ला दिया है। यहां बवासीर से परेशान एक मरीज ने कथित तौर पर स्थानीय नीम-हकीम की सलाह पर गर्म पत्थर से सिकाई की। सिकाई के दौरान करीब डेढ़ किलो का पत्थर शरीर के अंदर चला गया। हालत बिगड़ने पर मरीज को उर्सला जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां एक्स-रे में पत्थर दिखाई दिया और डॉक्टरों ने सर्जरी कर उसे बाहर निकाला। विशेषज्ञों के मुताबिक बवासीर में गर्म पत्थर या किसी वस्तु को शरीर के संवेदनशील हिस्से में डालना मान्य चिकित्सा उपचार नहीं है। इससे चोट, जलने, रक्तस्राव, संक्रमण और अंदरूनी अंगों को नुकसान जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।

बवासीर में इलाज मरीज की स्थिति और बीमारी की गंभीरता के अनुसार तय किया जाता है। शुरुआती मामलों में फाइबर युक्त भोजन, पर्याप्त पानी, कब्ज से बचाव और शौच के दौरान ज्यादा जोर न लगाने की सलाह दी जाती है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाएं या अन्य चिकित्सकीय उपचार भी दे सकते हैं। गंभीर या बार-बार रक्तस्राव वाले मामलों में विशेषज्ञ उपचार और कुछ स्थितियों में सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। अगर गुदा से लगातार या ज्यादा खून आए, तेज दर्द हो, बुखार या संक्रमण के संकेत दिखाई दें अथवा समस्या बार-बार हो रही हो, तो योग्य डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। बवासीर के लक्षण दिखने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई वस्तु, गर्म पदार्थ या घरेलू उपचार शरीर के अंदर इस्तेमाल न करें।


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