सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : वाहनों के प्रदूषण से पढ़ाई प्रभावित गुरुग्राम में वाहनों से निकलने वाला धुआं बच्चों की सेहत के साथ उनकी पढ़ाई को भी प्रभावित कर रहा है। इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (आईसीसीटी) की अक्टूबर 2026 में जारी अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में सड़क परिवहन से होने वाले प्रदूषण के कारण 5 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों और किशोरों के कुल 94,859 स्कूल दिवस प्रभावित हुए। यह संख्या 431 बच्चों के पूरे शैक्षणिक वर्ष के बराबर है।
अस्थमा के 89 नए मामलों का अनुमान
अध्ययन में यह भी अनुमान लगाया गया कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण के कारण बच्चों और किशोरों में अस्थमा के 89 नए मामले सामने आए। यानी औसतन लगभग हर चार दिन में एक नया मामला। प्रदूषण से होने वाली बीमारी के कारण बच्चों को स्कूल से अनुपस्थित रहना पड़ता है, जिससे उनकी कक्षाएं और सीखने की प्रक्रिया प्रभावित होती है।
निजी कारें प्रदूषण का प्रमुख स्रोत रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में सड़क परिवहन से होने वाले उत्सर्जन में निजी कारों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है। वर्ष 2025 में शहर में प्रति 1,000 लोगों पर लगभग 323 कारें थीं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि गुरुग्राम नगर निगम क्षेत्र में पीएम 2.5 के संपर्क में सड़क परिवहन की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के संपर्क में 20 प्रतिशत थी।
प्रदूषण कम करने के लिए स्वच्छ परिवहन पर जोर अध्ययन में शून्य-उत्सर्जन वाली स्कूल बसों और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने जैसे उपायों पर जोर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम में पंजीकृत सभी वाहनों को शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों में बदलने से बच्चों के स्वास्थ्य को मिलने वाले संभावित लाभों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा हासिल किया जा सकता है। हालांकि, शहर में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अन्य हिस्सों से रोजाना आने वाले वाहनों को देखते हुए व्यापक स्तर पर कदम उठाने की जरूरत है।
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