सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : राज्यसभा में एक महत्वपूर्ण जवाब देते हुए केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि हाल में जारी ग्लोबल एयर क्वालिटी रैंकिंग आधिकारिक नहीं है और भारत उसकी पुष्टि नहीं करता। सरकार ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा जारी कई ऐसे इंडेक्स या रिपोर्ट्स में पारदर्शिता की कमी होती है और उनका डेटा संग्रहण भारत के वास्तविक मानकों से मेल नहीं खाता।

स्वास्थ्य और पर्यावरण से संबंधित कई वैश्विक रिपोर्टें केवल सुझाव देने की भूमिका निभाती हैं, न कि आधिकारिक मूल्यांकन की। मंत्री ने यह भी कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी केवल दिशानिर्देश जारी करता है, लेकिन किसी देश की रैंकिंग तय नहीं करता। इसलिए भारत अपनी नीतियाँ विदेशी आकलनों के आधार पर नहीं बनाता, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से सत्यापित घरेलू डेटा पर निर्भर करता है।

सरकार ने जोर दिया कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के माध्यम से देश के 300 से अधिक शहरों में वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता की निगरानी की जाती है। यही डेटा भारत की पर्यावरण नीतियों और सुधार कार्यक्रमों का आधार बनता है।

मंत्री ने कहा कि बाहरी रिपोर्टों में कई बार आधे-अधूरे डेटा, अनुमानित मॉडलिंग या सीमित शहरों के आधार पर रैंकिंग जारी कर दी जाती है, जिससे यह वास्तविकता को नहीं दर्शाती। इसलिए गलतफ़हमियों को दूर करते हुए सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि भारत केवल अपने वैज्ञानिक मूल्यांकन को मान्यता देता है और स्वच्छ वायु के लिए नीति निर्माण पूरी तरह घरेलू डेटा पर आधारित है।

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