सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कोरोनरी आर्टरी डिजीज दुनियाभर में बीमारी और मौत के प्रमुख कारणों में बनी हुई है। भारत में इसके मामलों में विशेष रूप से चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अस्वस्थ खान-पान, धूम्रपान, डायबिटीज, हाइपरटेंशन और शारीरिक गतिविधि की कमी ने हर उम्र वर्ग में हृदय रोगों का बोझ बढ़ाया है।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज अब केवल बुजुर्गों तक सीमित बीमारी नहीं रही। कम उम्र के लोगों में भी जटिल कोरोनरी ब्लॉकेज के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में शुरुआती पहचान और समय पर उपचार पहले से अधिक जरूरी हो गया है। सीने में दर्द, सांस फूलना, अत्यधिक थकान, चक्कर आना और व्यायाम करने की क्षमता घटना जैसे सामान्य चेतावनी संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर चिकित्सा सहायता से उपचार के परिणाम बेहतर हो सकते हैं।
पिछले एक दशक में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे डॉक्टर कोरोनरी ब्लॉकेज का उपचार अधिक सटीकता, सुरक्षा और लंबे समय तक असरदार तरीके से कर पा रहे हैं। आधुनिक एंजियोप्लास्टी तकनीकों में अब अल्ट्रा-थिन स्ट्रट ड्रग-इल्यूटिंग स्टेंट (DES), जटिल रक्तवाहिका संरचना के लिए विशेष बाइफरकेशन स्टेंट और लंबी टैपर्ड स्टेंट तकनीक शामिल हैं, जो व्यापक कोरोनरी घावों का उपचार करते हुए रक्त प्रवाह को बेहतर बनाए रखने में मदद करती हैं।
पारंपरिक स्टेंटिंग से आगे बढ़कर धातु-रहित एंजियोप्लास्टी पद्धतियां भी कोरोनरी आर्टरी डिजीज के उपचार में संभावनाशील विकल्प के रूप में सामने आ रही हैं। BioResorbable Scaffolds रक्तवाहिका को अस्थायी सहारा देते हैं और समय के साथ धीरे-धीरे घुल जाते हैं। वहीं Drug-Coated Balloons स्थायी इम्प्लांट की जरूरत के बिना रक्तवाहिका की दीवार तक एंटी-प्रोलिफेरेटिव दवा सीधे पहुंचाते हैं। ये नवाचार चुनिंदा मरीजों में खास उपयोगी हैं और धमनी की प्राकृतिक कार्यप्रणाली को सुरक्षित रखने के व्यापक लक्ष्य से जुड़े हैं।
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