नए कर्मचारी की नौकरी दो काम करती है: आज उपयोगी योगदान देना और कल के कठिन कामों की तैयारी करना। जो नियोक्ता पहला काम मशीन को सौंप दे, लेकिन दूसरे की जगह कोई व्यवस्था न बनाए, उसकी तत्काल उत्पादकता तो बढ़ सकती है। साथ ही वह उस रास्ते को कमजोर कर सकता है जिससे उसके अगले विशेषज्ञ तैयार होंगे।
उपलब्ध प्रमाण केवल दोहराव वाले कामों को बचाए रखने से बेहतर विकल्प सुझाते हैं। 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन में एक बिजनेस सॉफ्टवेयर कंपनी और उसके ठेकेदारों के 5,172 ग्राहक-सहायता कर्मचारियों को शामिल किया गया। इनमें से ज्यादातर फिलीपींस में थे। एआई की सहायता से प्रति घंटे सुलझाए गए मामलों की संख्या औसतन लगभग 15 प्रतिशत बढ़ी। कम कुशल और कम अनुभवी कर्मचारियों के मामले में यह बढ़ोतरी करीब 30 प्रतिशत थी। ये नतीजे एक तरह की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं, पूरे भारत में रोजगार के भविष्य से नहीं। फिर भी वे बताते हैं कि हर दोहराव वाले काम को जस का तस बनाए रखना प्रशिक्षण की अच्छी नीति क्यों नहीं होगी।
असल सवाल यह है कि उपकरण का इस्तेमाल करते हुए नए कर्मचारी सीख क्या रहे हैं। नियोक्ताओं को वरिष्ठों की देखरेख में उन्हें समस्या पहचानने, सुझाए गए जवाब जाँचने और यह समझाने की जिम्मेदारी देनी चाहिए कि कोई समाधान उपयुक्त क्यों है। प्रशिक्षण के अगले चरणों में अपरिचित मामले और ऐसे अवसर भी हों जहाँ वे स्वचालित संकेतों के बिना अपना विवेक दिखा सकें। जल्दी जवाब देना उपयोगी है; उस जवाब की गलती पहचानना अलग क्षमता है।
इस तरह के प्रशिक्षण में अनुभवी कर्मचारियों का समय लगता है। स्वचालन के व्यावसायिक आकलन में सॉफ्टवेयर की सदस्यता और संभावित बचत के साथ यह लागत भी शामिल होनी चाहिए। यदि संगठन अनुभवी पेशेवर तैयार करने की जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तो वे हमेशा यह उम्मीद नहीं कर सकते कि बाहर का रोजगार बाजार उनकी जरूरत पूरी कर देगा।
इसके लिए पुराने पड़ चुके कामों का कोटा तय करना या हर मौजूदा पद को बनाए रखने का आश्वासन देना जरूरी नहीं है। जरूरी है सीखने का स्पष्ट रास्ता, जब तकनीक उस काम को बदल रही हो जिसके जरिए नए कर्मचारी दक्ष बनते हैं। शुरुआती स्तर का कोई काम हटाने से पहले प्रबंधक को बताने में सक्षम होना चाहिए कि उसकी जगह कौन-सा अभ्यास, काम के बारे में मिलने वाली कैसी प्रतिक्रिया और कौन-सी जिम्मेदारी उस काम से मिलने वाली सीख की भरपाई करेगी।