सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ के कार्यकाल के बाद पदभार संभालने वाले CJI बीआर गवई ने अपने विदाई समारोह के दौरान एक महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे बौद्ध धर्म को मानते हैं, लेकिन उनका विश्वास सभी धर्मों में समान रूप से है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान की मूल आत्मा सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और समभाव पर आधारित है, और न्यायपालिका इसी भावना के साथ कार्य करती है।
CJI गवई ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है, और न्यायिक व्यवस्था का दायित्व है कि वह प्रत्येक नागरिक को न्याय दिलाने में धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर कोई भेदभाव न करे। उन्होंने इस दौरान संविधान निर्माताओं के प्रति भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने देश को ‘समानता’, ‘न्याय’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ मूल्यों वाला ढांचा दिया।
अपने संबोधन में उन्होंने न्यायपालिका की चुनौतियों, बढ़ते केसों और न्याय तक सभी की समान पहुंच पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि न्यायिक सुधार और तकनीकी सुधारों को तेजी से लागू करना समय की मांग है। विदाई समारोह में मौजूद न्यायाधीशों, वरिष्ठ वकीलों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने उनके योगदान की सराहना की।
CJI गवई का यह वक्तव्य समाज और न्यायपालिका के बीच विश्वास को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
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