सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बढ़ती खेती लागत के बीच कई किसान जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर होने वाले खर्च को कम करने के लिए किसान गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट, जीवामृत और प्राकृतिक कीटनाशकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। किसानों के अनुसार, इससे खेती की लागत कम करने के साथ फसल की गुणवत्ता और बाजार में उसकी मांग बढ़ाने में मदद मिली है।
कर्वी तहसील के बैहार गांव निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक नत्थूराम ने वर्ष 2022 में जैविक खेती शुरू की थी। प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने जीवामृत तैयार कर खेती में इस्तेमाल किया। वर्तमान में वह करीब 18 बीघे में फसल और फलों की बागवानी कर रहे हैं। उनके अनुसार, जैविक खेती से उन्हें सालाना करीब 4 से 5 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है। वह आसपास के किसानों को भी जैविक खेती के लिए जागरूक कर रहे हैं।
मानिकपुर तहसील के बरहट गांव के किसान कोठारी सिंह पटेल भी धान, अरहर और ज्वार जैसी फसलें जैविक तरीके से उगा रहे हैं। वहीं, प्रगतिशील किसान योगेश जैन लंबे समय से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और गोबर व गौमूत्र से तैयार खाद का इस्तेमाल करते हैं।
कृषि विभाग के अनुसार, नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत चित्रकूट में वर्ष 2026-27 में 25 क्लस्टर बनाने और 3,125 किसानों को जैविक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। किसानों को प्रशिक्षण के साथ प्रोत्साहन के लिए अनुदान भी दिया जा रहा है।
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