सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उन आरोपों को खारिज किया है, जिनमें विपक्ष पर हिंसक प्रदर्शनों के जरिए सरकार बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया। चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस ने कभी हिंसक प्रदर्शन का समर्थन नहीं किया और पार्टी लोकतांत्रिक तथा गांधीवादी तरीकों से विरोध करने में विश्वास रखती है।
‘लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव चाहते हैं’ इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और सरकार की नीतियों से असहमति जताने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन तथा जनता के बीच जनमत तैयार करने का रास्ता अपनाती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का काम सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना और जनता के मुद्दों को सामने लाना है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध की आड़ में विपक्ष सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। चिदंबरम ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि कांग्रेस हिंसा के माध्यम से सत्ता परिवर्तन के पक्ष में नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को अस्थिर करने के लिए किसी अलग प्रयास की जरूरत नहीं है और सरकार अपने कामकाज से खुद ही जनता के सवालों का सामना करेगी।
एसआईआर और मतदाता सूची पर चुनाव आयोग से सवाल चिदंबरम ने चुनाव आयोग की मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एसआईआर और सामान्य संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) के बीच अंतर का उल्लेख करते हुए आयोग से स्पष्ट जानकारी देने की मांग की। उनके मुताबिक, कुछ राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया अपनाई गई, जबकि अन्य राज्यों में सामान्य पुनरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अलग-अलग प्रक्रियाएं अपनाने का आधार क्या है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े और आरोप विपक्ष की ओर से उठाए गए हैं; इनकी पुष्टि तथा प्रक्रिया की वैधता का निर्धारण संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायिक कार्यवाही के आधार पर होगा।
मौलिक अधिकारों की लड़ाई का दावा चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस का विरोध केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने मतदान करने, अपनी बात रखने, सभा करने और शांतिपूर्ण विरोध करने के अधिकारों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना और नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करना विपक्ष की वैध भूमिका का हिस्सा है। एसआईआर को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के बीच चिदंबरम का बयान राजनीतिक बहस को और तेज करता है। जहां बीजेपी विपक्ष की मंशा पर सवाल उठा रही है, वहीं कांग्रेस इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रही है।
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