सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुरैना। चंबल की डकैतों से जुड़ी पुरानी पहचान के बीच मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से निकलकर देव प्रभाकर सिंह तोमर ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके अनुसार, उनके दादा करीब 75 साल पहले पारिवारिक परिस्थितियों और तत्कालीन अधिकारियों से विवाद के बाद बागी बन गए थे। बाद में उनके चाचा ने भी यही रास्ता अपनाया। इसके विपरीत देव के पिता ने गांव छोड़कर शिक्षा का रास्ता चुना और शिक्षक बने।
देव ने शुरुआती पढ़ाई मध्य प्रदेश बोर्ड से की और छठी कक्षा में सीबीएसई स्कूल में दाखिला लिया। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने के कारण अंग्रेजी माध्यम और नए माहौल में उन्हें शुरुआत में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कक्षा 11वीं में उन्होंने आईआईटी में जाने का लक्ष्य बनाया और आर्थिक सीमाओं के बावजूद घर पर रहकर तैयारी की। इसके बाद उनका चयन आईआईटी रोपड़ में विद्युत अभियांत्रिकी के लिए हुआ।
आईआईटी से पढ़ाई के बाद देव को नीदरलैंड में फिलिप्स कंपनी में नौकरी मिली। वहां काम करने के दौरान उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी का फैसला किया। नौकरी छोड़कर भारत लौटने के बाद उन्होंने दिल्ली में शिक्षक के रूप में काम करते हुए तैयारी जारी रखी। शुरुआती प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया और लगातार प्रयास जारी रखा।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम में देव प्रभाकर सिंह तोमर ने 629वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की। इसके बाद उनका चयन भारतीय रेलवे यातायात सेवा के लिए हुआ। उनकी कहानी परिवार की पुरानी पहचान से अलग शिक्षा और सरकारी सेवा के क्षेत्र में बनाई गई नई राह को सामने रखती है।
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