सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दवाओं के विज्ञापन पर सख्ती की तैयारी केंद्र सरकार दवाओं के विज्ञापन और प्रचार को नियंत्रित करने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दवाओं का प्रचार करने से पहले संबंधित अनुमति लेना अनिवार्य किया जा सकता है। इसका उद्देश्य भ्रामक दावों, अप्रमाणित उपचारों और लोगों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगाना है। हालांकि, प्रस्तावित कानून के अंतिम प्रावधानों और लागू होने की तारीख को लेकर आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि आवश्यक है।

भ्रामक दावों पर लगेगी रोक दवाओं के विज्ञापनों में कई बार ऐसे दावे किए जाते हैं, जिनसे उपभोक्ताओं को किसी बीमारी के निश्चित इलाज या तुरंत राहत मिलने का भ्रम हो सकता है। सरकार की प्रस्तावित पहल का उद्देश्य ऐसे दावों की निगरानी मजबूत करना और दवा कंपनियों तथा प्रचार करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करना है।

डिजिटल मंचों पर भी हो सकती है निगरानी आज दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों का प्रचार सामाजिक माध्यमों, वीडियो मंचों और वेबसाइटों के जरिए भी किया जाता है। ऐसे में नई व्यवस्था के तहत डिजिटल विज्ञापनों की निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जा सकता है। इससे उपभोक्ताओं को दवाओं के बारे में सही और प्रमाणित जानकारी उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर जोर दवाओं के गलत प्रचार से लोग बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं के विज्ञापन में वैज्ञानिक प्रमाण, स्पष्ट जानकारी और जिम्मेदार प्रचार महत्वपूर्ण हैं। प्रस्तावित कानून के विस्तृत प्रावधान सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अनुमति की प्रक्रिया किन दवाओं, विज्ञापनों और प्रचार माध्यमों पर लागू होगी।


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