सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कोयंबटूर ब्लास्ट के पांच दोषियों को पैरोल, विजय सरकार पर बीजेपी का हमला

तमिलनाडु में 1998 के कोयंबटूर सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पांच दोषियों को 60 दिन की पैरोल दिए जाने पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) सरकार के इस फैसले की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कड़ी आलोचना की है। बीजेपी ने पैरोल तत्काल रद्द करने की मांग करते हुए सरकार पर गंभीर अपराध के दोषियों के प्रति नरमी बरतने का आरोप लगाया है।

किन पांच दोषियों को मिली पैरोल? पैरोल पाने वालों में मोहम्मद अंसारी, मोहम्मद अली, मोनप्पा उर्फ मोहम्मद हसन, मोहम्मद अजम और नवाब खान शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, निजी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों के आधार पर उन्हें 60 दिनों की पैरोल दी गई है। ये सभी कोयंबटूर केंद्रीय जेल में बंद उम्रकैद के दोषियों में शामिल हैं और लंबे समय से सजा काट रहे हैं।

बीजेपी ने क्या कहा? तमिलनाडु बीजेपी के प्रवक्ता नारायण तिरुपति ने फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि निजी कारण किसी गंभीर आतंकवादी हमले की भयावहता से ऊपर नहीं हो सकते। उन्होंने पैरोल के आदेश को वापस लेने की मांग की। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन और नेता वनाथी श्रीनिवासन ने भी फैसले पर सवाल उठाए। बीजेपी नेताओं ने पूछा कि पैरोल किन आधारों पर और किसकी सिफारिश पर मंजूर की गई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक हितों के कारण दोषियों के प्रति नरमी दिखा रही है। ये आरोप बीजेपी के राजनीतिक बयान हैं।

सत्तारूढ़ पक्ष ने फैसले का किया समर्थन दूसरी ओर, टीवीके विधायक वी.एम.एस. मुस्तफा ने पैरोल के फैसले का समर्थन किया। विदुथलाई चिरुथैगल काची (वीसीके) के नेता और सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरसु ने भी इसका स्वागत किया। उनके अनुसार, लंबे समय से जेल में बंद कैदियों को राहत दिलाने के लिए उनकी पार्टी लगातार प्रयास कर रही थी।

1998 के धमाकों में 58 लोगों की हुई थी मौत 14 फरवरी 1998 को कोयंबटूर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 58 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। ये विस्फोट बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की चुनावी रैली से पहले हुए थे। इस मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया और सजा सुनाई गई थी। पांच दोषियों को पैरोल दिए जाने के बाद तमिलनाडु में कानून, न्याय और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस शुरू हो गई है। अब इस मामले में सरकार के फैसले और बीजेपी की पैरोल रद्द करने की मांग पर सबकी नजर है।


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