सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क – आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में “भारतीयज्ञानपरंपरायांम विज्ञानस्रोतांसि” विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति श्रीनिवास वरखेड़ी के संरक्षण के आयोजित की गई। इस कार्यशाला में डॉ.अतुल कोठारी ,राष्ट्रीय सचिव , शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, भोपाल परिसर निदेशक रमाकांत पाण्डेय ने की । इस अवसर पर परिसर के सह निदेशक गोविंद पांडेय उपस्थित थे ।


मुख्य वक्ता अतुल कोठारी ने अपने उद्बोधन मै कहा कि संस्कृत छात्रो का सौभाग्य है कि आप सभी हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा को सम्पूर्ण विश्व तक पहुचाने का कार्य करेंगे । उन्होंने भारतीय शिक्षा नीति २०२० के बारे मैं बताया की यह पहली ऐसी नीति है जो भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ती है । इस शिक्षा नीति का मुख्य आधार भारतीयता है । सर्वप्रथम हम सभी को अपनी संस्कृति, ज्ञान, परंपरा, दर्शन, को जानना चाहिए । शिक्षा किसी भी देश की नींव होती है । श्रेष्ठ ज्ञान को जानने के लिए पाठ्यक्रम को समझना ज़रूरी है ।समग्र एकाग्र दृष्टि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य है । शिक्षा स्किल डेवलपमेंट के लिए होना चाहिए, इसको अनिवार्य रूप से प्राप्त करना है । वर्तमान शिक्षा प्रणाली मे परीक्षा, मूल्यांकन बहुत बड़ी समस्या है । शिक्षा में आध्यात्मिकता का समावेश होना चाहिए ।


इस कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित अनेक पक्षों को उद्धृत किया गया
कार्यक्रम के अध्यक्ष परिसर निदेशक रमाकांत पांडेय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन मैं कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को हमको समझना, जानना आवश्यक है । यह हमारी प्राचीन परंपरा है और सभी मनुष्य उससे जुड़े हुए है परंतु उसको व्यवहार में लाना जरूरी है । इस कार्यक्रम के संयोजक प्रो.कृपाशंकर शर्मा एवं सह संयोजिका श्रावणी पांडे थी ।

#भारतीयज्ञानपरंपरा #संस्कृतविश्वविद्यालय #भोपालकार्यशाला #शिक्षा #संस्कृति